ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर किए मिसाइल और ड्रोन हमले, गल्फ देशों को भी बनाया निशाना
ईरान की IRNA न्यूज़ एजेंसी ने 28 मार्च, 2026 को जानकारी दी कि ईरान ने अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इन हमलों को अमेरिका-इजरायल के हमलों का ‘सही जवाब और फ़र्ज़’ बताया है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने अपनी आधिकारिक न्यूज़ वेबसाइट, सेपाह न्यूज़ के ज़रिए मिसाइल लॉन्च की रिपोर्ट भी दी.
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4: अमेरिका और इजरायल को निशाना
26 मार्च, 2026 को, ईरान की सशस्त्र सेना और सहयोगी प्रतिरोध समूहों ने अमेरिका और इजरायल के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई जारी रखी. ईरान के इंग्लिश-लैंग्वेज प्रेस टीवी ने इस बारे में बताया. इसी दिन, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) और ईरानी सेना ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत कई हमले किए.
- इन ऑपरेशनों में 84 बार मिसाइल और ड्रोन से हमले हुए, जिसमें नए हथियारों का इस्तेमाल किया गया.
- इन हमलों में इजरायल की सैन्य सुविधाओं और पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया.
- इजरायल के नेवतिम और रामत डेविड एयरबेस, तेल अवीव और हाइफ़ा जैसे बड़े आर्थिक केंद्र, और डिमोना के परमाणु सुविधा स्थल के पास के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया.
- ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ की 82वीं लहर में, ईरान ने खासतौर पर ज़ायोनी शासन के सैन्य कमांड कंट्रोल सेंटर और उसकी परमाणु इंडस्ट्री से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया.
खाड़ी देशों और क्षेत्रीय सहयोगियों पर भी हमले
28 मार्च, 2026 तक, ईरान ने अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों, जैसे सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे. ये हमले उन देशों पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किए गए, जिन्हें अमेरिका के ऑपरेशनों का समर्थन करने वाला माना जाता है. ईरान ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सभी छह सदस्यों पर हमला किया है.
- इराक में, तेहरान से जुड़े मिलिशिया समूह अमेरिकी हवाई अड्डों, सुविधाओं और अन्य अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले कर रहे थे.
- लेबनानी हिज़्बुल्लाह और इराक में इस्लामिक रेजिस्टेंस ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया और दुश्मन के ठिकानों को नुकसान पहुँचाया.
- इराकी प्रतिरोध समूह मुख्य रूप से अमेरिकी सैन्य ठिकानों के ख़िलाफ़ रोज़ाना ऑपरेशन कर रहे हैं.
- 20 मार्च से 27 मार्च 2026 के बीच, ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले पहले की तुलना में कम हुए, लेकिन फिर भी खाड़ी देशों के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगातार ख़तरा बने रहे.




