ईरान के तेल डिपो पर हमलों से भड़का गुस्सा, मंत्री ने इसे बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और पर्यावरण अपराध
ईरान के तेल मंत्री Mohsen Paknejad ने इजरायल और अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ईरान के तेल डिपो और गैस रिफाइनरी पर हुए हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। इन हमलों को ‘इकोसाइड’ यानी पर्यावरण के खिलाफ बड़ा अपराध बताया गया है। ईरान ने इस मामले को अब संयुक्त राष्ट्र (UN) के सामने मजबूती से उठाया है और हमले करने वालों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। हमलों की वजह से क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।
ईरान के तेल ठिकानों पर हुए हमलों का विवरण और असर
ईरान ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि मार्च के महीने में उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया गया है। इस स्थिति को लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:
- 7 और 18 मार्च 2026 को ईरान के कई तेल भंडार और रिफाइनरी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
- तेल मंत्री Mohsen Paknejad ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर बताया कि यह हमले अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हैं।
- राजदूत Saeed Iravani ने कहा कि इन हमलों से पर्यावरण, जन स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
- ईरान ने मांग की है कि इस भौतिक और नैतिक नुकसान की पूरी भरपाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जाए।
- हमलों के असर के चलते 8 मार्च को ही तेहरान में ईंधन खरीदने के कोटे में कटौती करनी पड़ी थी।
ईरानी सेना की जवाबी कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी सेना ने भी जवाबी हमले करने का दावा किया है। सेना की ओर से जारी आधिकारिक बयान में यह बातें कही गई हैं:
- ईरानी सेना ने 28 मार्च 2026 को बयान जारी कर Haifa में रडार सेंटर्स पर ड्रोन हमले की बात कही है।
- सेना के ड्रोन्स ने Ben Gurion Airbase के तेल भंडारण केंद्रों को भी निशाना बनाने का दावा किया।
- इन हमलों को अमेरिका और इजरायल की ओर से की गई आक्रामकता का सीधा जवाब बताया गया है।
- ईरान का मानना है कि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला उसकी आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
- इस तनाव की वजह से आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।




