अमेरिका का ईरान पर ज़मीनी हमले का प्लान तैयार, पेंटागन की रिपोर्ट से खाड़ी देशों में बढ़ी हलचल
वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ईरान में ज़मीनी सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। यह ऑपरेशन कुछ हफ्तों तक चल सकता है जिसमें विशेष सैन्य मिशन शामिल होंगे। हालांकि अभी तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस योजना को अंतिम मंजूरी नहीं दी है। इस खबर के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
अमेरिकी सैन्य योजना के मुख्य बिंदु और संभावित लक्ष्य क्या हैं?
पेंटागन की इस तैयारी का उद्देश्य पूरे ईरान पर कब्जा करना नहीं बल्कि कुछ खास जगहों को निशाना बनाना है। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान महीनों के बजाय केवल कुछ हफ्तों तक चल सकता है। योजना के मुख्य पहलुओं को नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| संभावित लक्ष्य | अभियान का उद्देश्य |
|---|---|
| खार्ग द्वीप (Kharg Island) | ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र को नियंत्रित करना |
| होर्मुज जलडमरूमध्य तटीय क्षेत्र | समुद्री व्यापार के रास्तों से खतरा कम करना |
| सैन्य ठिकाने | मिसाइल और ड्रोन हमलों की क्षमता को रोकना |
इस ऑपरेशन के लिए अमेरिकी मरीन और 82nd Airborne Division के हजारों सैनिकों को पहले ही मिडिल ईस्ट भेजा जा चुका है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक सीमित अभियान होगा जिसका मकसद केवल विशिष्ट सैन्य लक्ष्यों को हासिल करना है।
इस संभावित हमले पर अमेरिकी अधिकारियों और ईरान का क्या रुख है?
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया है कि पेंटागन का काम राष्ट्रपति को हर स्थिति के लिए तैयार रखना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमले का फैसला हो गया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा है कि अमेरिका बिना ज़मीनी सेना के भी अपने लक्ष्य पा सकता है, फिर भी हर परिस्थिति के लिए सेना को तैयार रहना होगा। दूसरी तरफ ईरान ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है।
- ईरान ने अपने द्वीपों पर किसी भी हमले के खिलाफ अमेरिका को चेतावनी दी है।
- ईरानी सेना को निर्देश दिए गए हैं कि अगर कमांड सेंटर से संपर्क टूटे तो वे स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करें।
- ईरान के मुताबिक युद्ध का फैसला केवल मैदान में ही हो सकता है।
- यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस संघर्ष में शामिल होने का एलान किया है।
- सऊदी अरब और इजरायल पर भी इस तनाव का सीधा असर देखने को मिल रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है क्योंकि तनाव बढ़ने से हवाई उड़ानों और सुरक्षा नियमों में बदलाव हो सकते हैं। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच यह संघर्ष पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और स्थिति लगातार बदल रही है।



