Jordan US Base Attack: जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान का ड्रोन हमला, सेना ने किया बड़ा दावा
ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सेना के ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार यह हमला अजराक (Azraq) में स्थित मुवाफ्फाक साल्ती एयर बेस (Muwaffaq Salti Air Base) पर ड्रोन के जरिए किया गया। ईरानी सेना का कहना है कि इस हमले में अमेरिकी सेना के रहने के ठिकानों और सैन्य उपकरणों को निशाना बनाया गया है। अब तक अमेरिका या जॉर्डन के अधिकारियों ने इस हमले की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।
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ईरान के इस हमले में किन ठिकानों को निशाना बनाया गया?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस ड्रोन हमले की जिम्मेदारी ली है। मुवाफ्फाक साल्ती एयर बेस को अमेरिका के क्षेत्रीय ऑपरेशन्स का एक मुख्य केंद्र माना जाता है। हमले में सैनिकों के रहने की जगह और उनके मिलिट्री इक्विपमेंट को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। जॉर्डन की सेना ने हाल के दिनों में अपनी सीमा में आने वाली कई मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराया है। यह घटना उस समय हुई है जब क्षेत्र में तनाव काफी अधिक बना हुआ है।
क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के दौरान हुई बड़ी घटनाएं
मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है और पिछले 24 घंटों में कई सैन्य गतिविधियां देखी गई हैं। ईरान ने न केवल जॉर्डन बल्कि सऊदी अरब में भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया है। इन घटनाओं से जुड़ी मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
| क्षेत्र/देश | घटना का विवरण |
|---|---|
| Jordan | मुवाफ्फाक साल्ती एयर बेस पर ईरानी ड्रोन हमले का दावा किया गया। |
| UAE | एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से आई 16 मिसाइलों और 42 ड्रोनों को रोका। |
| Saudi Arabia | ईरान ने प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमले का दावा किया, जिसमें अमेरिकी विमानों के नुकसान की बात कही गई। |
| Iran | ईरान के उस्मावंदन गांव में हुए कथित अमेरिकी-इजरायली हमले में 6 लोगों की मौत हुई। |
ईरानी संसद के अध्यक्ष ने अमेरिका पर गुप्त रूप से जमीनी हमले की योजना बनाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर उनके विश्वविद्यालयों पर हुए हमलों की निंदा नहीं की गई, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कैंपस भी निशाने पर आ सकते हैं। जॉर्डन ने पहले भी अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की थी। फिलहाल क्षेत्र के सभी देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटे हैं।




