इजरायल ने तेहरान पर दागे 120 से ज्यादा बम, मिसाइल और ड्रोन फैक्ट्रियों को किया तबाह, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव
इजरायली सेना ने ईरान की राजधानी तेहरान में हथियारों के रिसर्च, विकास और उत्पादन केंद्रों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। 29 मार्च 2026 को हुई इस कार्रवाई में इजरायल ने 120 से ज्यादा बम गिराने का दावा किया है। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइल के कलपुर्जे बनाने वाली फैक्ट्रियों और ड्रोन निर्माण केंद्रों को भारी नुकसान पहुँचा है। इस घटना के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और कई देशों ने अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी है।
इजरायल ने तेहरान में किन जगहों को निशाना बनाया?
इजरायली सेना (IDF) ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि उनके लड़ाकू विमानों ने तेहरान में सामरिक महत्व के ठिकानों पर हमला किया है। इसमें शामिल मुख्य ठिकाने इस प्रकार हैं:
- बैलिस्टिक मिसाइल के अहम हिस्से बनाने वाली बड़ी फैक्ट्री।
- ड्रोन बनाने वाले सेंटर और मिसाइल रखने के गोदाम।
- ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम और मरीन इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन का मुख्यालय।
- ईरान के कुछ स्टील प्लांट और परमाणु बुनियादी ढांचों के पास के इलाके।
- तेहरान और अल्बोर्ज प्रांत में बिजली के बुनियादी ढांचे पर हमला, जिससे कई इलाकों में बिजली गुल हो गई।
खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रों में क्या स्थिति है?
इस हमले के बाद ईरान ने पलटवार की बात कही है और पड़ोसी देशों में भी इसका असर देखने को मिला है। कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों ने भी मिसाइल और ड्रोन की हलचल की जानकारी दी है।
| देश | ताजा अपडेट |
|---|---|
| कुवैत | बीते 24 घंटों में 14 मिसाइल और 12 ड्रोन देखे गए, 10 सैनिक घायल हुए। |
| सऊदी अरब | रियाद क्षेत्र को निशाना बनाकर छोड़ी गई मिसाइल को हवा में ही रोका गया। |
| लेबनान | इजरायली हमलों में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की जान गई है। |
| अमेरिका | USS Tripoli जहाज 3500 सैनिकों के साथ मिडिल ईस्ट पहुँच गया है। |
| पाकिस्तान और तुर्की | तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक बातचीत में जुटे हैं। |
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका और इजरायल से जुड़ी यूनिवर्सिटी को भी निशाना बनाने की धमकी दी है। इसके अलावा ईरान के संसद अध्यक्ष ने अमेरिकी सैनिकों के जमीन पर आने की स्थिति में कड़ा जवाब देने की बात कही है। सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति काफी गंभीर है क्योंकि इससे उड़ानों और सुरक्षा नियमों पर सीधा असर पड़ता है।




