ईरान और अमेरिका के बीच शांति की कोशिश तेज, पाकिस्तान में सऊदी और तुर्की के साथ हुई अहम बैठक
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान में बड़ी कूटनीतिक बैठक शुरू हुई है। रविवार 29 मार्च 2026 को इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य युद्ध को रोकना और समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण रास्तों को फिर से बहाल करना है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने स्पष्ट किया कि युद्ध से किसी का भला नहीं होगा और सभी देश जल्द शांति चाहते हैं।
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शांति वार्ता और समुद्री रास्तों को लेकर क्या हुए फैसले?
इस्लामाबाद में हुई इस बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई है ताकि क्षेत्र में स्थिरता वापस आ सके। पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच एक संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा है। बैठक के दौरान निम्नलिखित मुख्य बातें सामने आई हैं:
- ईरान ने पाकिस्तानी झंडे वाले 20 जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति दे दी है।
- अमेरिका ने शांति के लिए ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अभी विचार किया जा रहा है।
- तेल की सप्लाई को सुचारू रखने के लिए तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब का एक साझा ग्रुप बनाने पर चर्चा हुई है।
- सोमवार 30 मार्च 2026 को इन देशों के प्रतिनिधि दोबारा मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
- अमेरिका और ईरान दोनों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा जताया है।
युद्ध के हालात और जमीनी हकीकत क्या है?
एक तरफ जहां शांति की बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ सीमा पर तनाव कम नहीं हुआ है। ईरानी मीडिया के अनुसार रविवार को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में एक बंदरगाह शहर में 5 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले शनिवार को भी लेबनान और अन्य इलाकों में संघर्ष की खबरें आई थीं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि पाकिस्तान इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए पूरी तरह तैयार है। सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने पाकिस्तान की इस पहल को अपना पूरा समर्थन दिया है ताकि क्षेत्र में सीधी बातचीत का रास्ता साफ हो सके। चीन ने भी पाकिस्तान की इस कोशिश की तारीफ की है।




