भारत में और महंगी हो सकती है चीजें, कच्चे तेल की कीमतों में $10 की बढ़ोतरी से 0.60% तक बढ़ेगी महंगाई
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी का सीधा असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर दिखने वाला है। केयरएज ग्लोबल (CareEdge Global) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगर कच्चे तेल के दाम में 10 डॉलर प्रति बैरल की भी वृद्धि होती है, तो इससे भारत की महंगाई दर यानी इन्फ्लेशन में 55 से 60 बेसिस पॉइंट तक का इजाफा हो सकता है। यह अनुमान वित्त वर्ष 2027 के लिए लगाया गया है, जिससे आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ अन्य जरूरी सामान भी महंगे हो सकते हैं।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) बास्केट में ईंधन का वजन काफी ज्यादा है। जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियां शुरू में कुछ दबाव खुद झेलती हैं, लेकिन अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका बोझ सीधा ग्राहकों पर डाल दिया जाता है। इसके अलावा, तेल की कीमतों में $10 की वृद्धि से भारत का चालू खाता घाटा (CAD) भी 30-40 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकता है।
- महंगाई दर में 0.55% से 0.60% तक की बढ़ोतरी संभव है
- भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5% से 6.8% के बीच रहने का अनुमान है
- अगर कच्चा तेल $100 के पार गया, तो विकास दर 6.6% तक गिर सकती है
- ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से माल ढुलाई महंगी हो जाती है
सरकार और अन्य विशेषज्ञों का क्या है कहना?
भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की थी ताकि तेल कंपनियों के नुकसान को कम किया जा सके और आम आदमी को राहत मिले। अलग-अलग संस्थाओं ने महंगाई को लेकर अपने अलग आंकड़े पेश किए हैं जिन्हें नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है।
| संस्था का नाम | महंगाई पर अनुमानित असर |
|---|---|
| CareEdge Global | 55-60 बेसिस पॉइंट |
| ICICI Bank | 50-60 बेसिस पॉइंट |
| EY Report | 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी (युद्ध की स्थिति में) |
| RBI Analysis | महंगाई में 30 बेसिस पॉइंट की वृद्धि |




