West Asia संघर्ष: भारत की GDP को लगेगा 1% का झटका, आम आदमी पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। Ernst & Young (EY) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत की आर्थिक रफ्तार (GDP) में 1 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इसके साथ ही आम जनता पर महंगाई की मार भी पड़ सकती है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़त का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इससे सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
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आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
EY की ‘Economy Watch’ रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट की वजह से भारत की असली GDP ग्रोथ अपने पुराने अनुमान से गिर सकती है। भारत अपनी जरूरत का बहुत बड़ा हिस्सा बाहर से मंगवाता है, इसलिए वैश्विक बाजार में हलचल का सीधा असर यहां पड़ता है। रिपोर्ट में कुछ प्रमुख चेतावनियां दी गई हैं:
- भारत की असली GDP ग्रोथ 7 प्रतिशत के बेसलाइन अनुमान से 1 प्रतिशत कम रह सकती है।
- महंगाई दर 4 प्रतिशत के अनुमान से बढ़कर 5.5 प्रतिशत तक जा सकती है।
- कच्चे तेल के साथ-साथ खाद और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेजी आ सकती है।
- सप्लाई चेन में रुकावट आने से सामानों की ढुलाई महंगी हो सकती है।
सरकार की तैयारी और एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
भारत सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने भी माना है कि पश्चिम एशिया के संकट से आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) के साथ बैठक करके हालात की समीक्षा की है। मुख्य आर्थिक सलाहकार V. Anantha Nageswaran का कहना है कि इसका असर देश के राजकोषीय और बाहरी संतुलन पर पड़ना तय है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिए नई पॉलिसी लानी होगी।
| प्रमुख बिंदु | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| कच्चा तेल आयात निर्भरता | लगभग 90 प्रतिशत |
| GDP पर असर | 1 प्रतिशत की गिरावट का डर |
| महंगाई में बढ़त | 1.5 प्रतिशत तक का उछाल |
| सरकारी बैठक | प्रधानमंत्री ने CCS के साथ चर्चा की |




