Donald Trump का ईरान को आखिरी अल्टीमेटम, समझौता नहीं हुआ तो बिजली घर और तेल के कुएं कर देंगे तबाह
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर एक बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर तेहरान के साथ जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के बिजली घरों, तेल के कुओं और अन्य अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बनाएगा। Trump ने यह बात अपने सोशल मीडिया पोस्ट और एक इंटरव्यू के दौरान कही है। इस खबर से खाड़ी क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है क्योंकि इसका सीधा असर तेल की कीमतों और सुरक्षा पर पड़ सकता है।
Trump ने किन जगहों को निशाना बनाने की बात कही है?
Donald Trump ने अपनी चेतावनी में स्पष्ट किया है कि अगर ईरान के साथ सैन्य अभियान रोकने का समझौता नहीं हुआ, तो कार्रवाई बहुत बड़ी होगी। उनके द्वारा बताए गए मुख्य लक्ष्य नीचे दिए गए हैं:
- ईरान के सभी इलेक्ट्रिक जनरेटिंग प्लांट यानी बिजली घर
- तेल के कुएं और Kharg Island जो ईरान का मुख्य एक्सपोर्ट हब है
- पानी को साफ करने वाले सभी डिसेलिनेशन प्लांट
- Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने की शर्त रखी गई है
Trump ने कहा है कि अमेरिका के पास ईरान में लगभग 3,000 ऐसे टारगेट हैं जिन्हें वह निशाना बना सकता है। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को उन अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला बताया है जो पिछले दशकों में ईरान की वजह से मारे गए हैं।
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर क्या असर हो सकता है?
इस तनाव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के देशों जैसे कुवैत और यूएई पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| देश/क्षेत्र | मौजूदा घटनाक्रम |
|---|---|
| Kuwait | तेहरान ने कुवैत के एक प्रमुख पानी और बिजली प्लांट पर हमला किया है। |
| UAE | संयुक्त अरब अमीरात ने संकेत दिया है कि वह किसी भी युद्धविराम में ईरान को निहत्था देखना चाहता है। |
| Israel | इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए हमले कर रहे हैं। |
| Strait of Hormuz | इसके बंद होने से दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुक सकती है और महंगाई बढ़ सकती है। |
ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत की खबरों को गलत बताया है। दूसरी ओर Trump का दावा है कि उनकी बातचीत एक नई और समझदार सरकार के साथ चल रही है जिसमें काफी प्रगति हुई है। खाड़ी में मौजूद हजारों अमेरिकी सैनिक और विशेष बल भी अलर्ट पर रखे गए हैं।




