Strait of Hormuz: ईरान का नया फरमान, बिना मंज़ूरी नहीं गुज़रेंगे जहाज़, देना होगा करोड़ों का टैक्स
ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण पूरी तरह से कड़ा कर लिया है और साफ़ कहा है कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी जहाज़ वहां से नहीं गुज़रेगा। फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने यह कदम उठाया है। अब यहां से केवल उन्हीं जहाज़ों को निकलने दिया जा रहा है जिन्हें ईरान ने सुरक्षित माना है। इस नए सिस्टम के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ रहा है।
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जहाज़ों के लिए ईरान के नए नियम और शर्तें क्या हैं?
ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) को जानकारी दी है कि अब इस रास्ते से केवल गैर-आक्रामक जहाज़ ही गुज़र सकेंगे। इसका मतलब है कि जो देश ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं हैं, उनके जहाज़ों को ही अनुमति मिलेगी। अमेरिका और इज़राइल से जुड़े किसी भी जहाज़ या संपत्ति को यहां से निकलने की इजाज़त नहीं होगी। अब जो भी जहाज़ वहां से गुज़र रहे हैं, उन्हें ईरानी तट के पास से तय रास्तों का पालन करना पड़ रहा है और ईरानी अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहना पड़ रहा है।
टैक्स और किन देशों को मिली है राहत?
ईरान एक नया कानून लाने की तैयारी में है जिसके तहत वहां से गुज़रने वाले हर जहाज़ को अपनी पूरी जानकारी साझा करनी होगी। इसके साथ ही हर जहाज़ को लगभग 20 लाख डॉलर (करीब 16.5 करोड़ रुपये) का टैक्स देना पड़ सकता है। यह शुल्क युआन या क्रिप्टोकरेंसी में चुकाना होगा। राहत की बात यह है कि भारत, चीन, रूस और जापान जैसे देशों को ईरान ने गुज़रने की अनुमति दी है। हाल ही में भारत के कुछ गैस टैंकरों को इस रास्ते से सुरक्षित निकाला गया है।
| विवरण | ताज़ा आंकड़े और जानकारी |
|---|---|
| सामान्य दिनों में जहाज़ों की संख्या | 135 प्रति दिन |
| मार्च 2026 में जहाज़ों की संख्या | 6 प्रति दिन |
| प्रस्तावित टैक्स राशि | $2 मिलियन (प्रति जहाज़) |
| भुगतान का माध्यम | युआन या क्रिप्टोकरेंसी |
| छूट प्राप्त देश | भारत, चीन, रूस, स्पेन, जापान |
अमेरिका का रुख और सऊदी अरब पर असर
इस स्थिति को लेकर अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर यह रास्ता तुरंत व्यापार के लिए नहीं खुला, तो वह ईरानी तेल कुओं और बिजली घरों को निशाना बना सकता है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरें भी आ रही हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि उसके तेल निर्यात और खाने-पीने की चीज़ों की सप्लाई इसी रास्ते पर निर्भर है। स्पेन को इस रास्ते पर फ्री पास दिया गया है क्योंकि उसने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था।




