अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए आगे आए चार देश, पाकिस्तान में सीधी बातचीत का प्रस्ताव
पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र ने मिलकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक विशेष टीम बनाई है। इस्लामाबाद में दो दिनों तक चली हाई-लेवल बैठक के बाद पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की है। हालांकि, ईरान ने अभी तक अमेरिका के शांति प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और जमीनी स्तर पर तनाव अब भी बरकरार है। यह पहल खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के खतरे को टालने के लिए की जा रही है।
इस्लामाबाद में हुई बैठक के मुख्य बिंदु क्या हैं?
29 और 30 मार्च 2026 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चार मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सैन्य तनाव को रोकना और मुस्लिम उम्माह की एकता को बनाए रखना था। पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने कहा कि युद्ध से किसी का भला नहीं होगा और यह केवल विनाश लेकर आएगा। पाकिस्तान ने जानकारी दी है कि अमेरिका और ईरान ने बातचीत के लिए पाकिस्तान पर भरोसा जताया है और आने वाले दिनों में यहां सीधी चर्चा आयोजित की जा सकती है।
अमेरिका और ईरान की इस बातचीत पर क्या प्रतिक्रिया है?
इस पूरी प्रक्रिया में कई चुनौतियां बनी हुई हैं जिनकी वजह से समझौता मुश्किल लग रहा है। प्रमुख देशों और पक्षों का रुख कुछ इस प्रकार है:
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को सकारात्मक बताया है लेकिन 6 अप्रैल तक का अल्टीमेटम भी दिया है।
- ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को तर्कहीन बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है।
- इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इन वार्ताओं का हिस्सा नहीं है और अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।
- ईरान के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इन बैठकों में सीधे तौर पर शामिल होने की खबरों से इनकार किया है।
- चीन और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने पाकिस्तान द्वारा की जा रही इस शांति पहल का समर्थन किया है।
- ट्रंप प्रशासन ईरान के तेल निर्यात केंद्र खार्क द्वीप पर नियंत्रण करने जैसे सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है।




