अरब देशों को मिडिल ईस्ट युद्ध से होगा 200 अरब डॉलर का घाटा, UN की रिपोर्ट में 36 लाख नौकरियों पर खतरे की बात
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने एक ताज़ा रिपोर्ट जारी कर बताया है कि मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव के चलते अरब देशों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। 31 मार्च 2026 को आई इस स्टडी के मुताबिक, इस युद्ध की वजह से अरब देशों की सामूहिक जीडीपी (GDP) में 120 अरब डॉलर से लेकर 194 अरब डॉलर तक की गिरावट आ सकती है। इस संकट की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट की आर्थिक विकास दर को लगभग 200 अरब डॉलर का झटका लग सकता है।
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युद्ध के आर्थिक नुकसान से जुड़े मुख्य आंकड़े क्या हैं?
UNDP की रिपोर्ट में बताया गया है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस तनाव को पांच हफ्ते बीत चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और G7 के वित्त नेताओं ने भी इस पर चिंता जताई है कि युद्ध की वजह से बाजार में अस्थिरता पैदा हो गई है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों और लेवेंट क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान होने का अनुमान है, जहाँ जीडीपी में 5.2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी जा सकती है।
| प्रभाव का प्रकार | अनुमानित डेटा |
|---|---|
| कुल आर्थिक नुकसान | 120 से 194 अरब डॉलर |
| बेरोजगारी में बढ़ोत्तरी | 4 प्रतिशत तक |
| नौकरी जाने का खतरा | 36 लाख लोग |
| गरीबी रेखा के नीचे जाने वाले लोग | 40 लाख लोग |
आम जनता और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
इस आर्थिक गिरावट का सीधा असर आम लोगों की नौकरियों और कमाई पर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 36 लाख लोगों की नौकरी जा सकती है, जिससे बेरोजगारी दर में भारी उछाल आएगा। खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासी भारतीयों के लिए भी यह खबर चिंताजनक है, क्योंकि आर्थिक सुस्ती की वजह से कंपनियों में छंटनी और नई भर्तियों पर रोक लग सकती है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा है कि यह देशों के लिए अपनी नीतियों पर फिर से विचार करने का समय है।




