मिस्र ने खाड़ी देशों का दिया साथ, ईरान के हमलों के खिलाफ दिखाई एकजुटता, सुरक्षा पर कही बड़ी बात
मिस्र ने सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाई है। ईरान के हालिया हमलों को देखते हुए मिस्र ने साफ किया है कि वह अपने अरब भाइयों के साथ मजबूती से खड़ा है। मिस्र की सरकार और वहां की संसद ने इन हमलों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया है। उनका कहना है कि खाड़ी देशों की सुरक्षा सीधे तौर पर मिस्र की अपनी सुरक्षा से जुड़ी हुई है और इसमें किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
मिस्र ने सुरक्षा और व्यापार को लेकर क्या चेतावनी दी है?
मिस्र की संसद और सीनेट ने एक साझा बयान में कहा है कि ईरान के हमले अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ हैं। अगर ये हमले नहीं रुके, तो इसका असर पूरे क्षेत्र के कारोबार पर भी पड़ेगा। खासकर Strait of Hormuz जैसे समुद्री रास्तों पर रुकावट आने से गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। मिस्र ने जॉर्डन पर हुए हमलों की भी कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे देशों की संप्रभुता का उल्लंघन माना है। सरकार का मानना है कि इन मसलों को सैन्य ताकत के बजाय शांति और कूटनीति से सुलझाना चाहिए। विशेषज्ञों का भी मानना है कि नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना एक खतरनाक संकेत है।
किन बड़े नेताओं के बीच हुई है सुरक्षा पर चर्चा?
- राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से जेद्दा में मुलाकात कर सुरक्षा हालातों पर चर्चा की।
- मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती ने कतर के प्रधानमंत्री के साथ बैठक कर अपना समर्थन दोहराया।
- रियाद में हुई मंत्रियों की बैठक में मिस्र ने साफ किया कि अरब देशों की सुरक्षा में किसी भी बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- बहरीन के राजा के साथ हुई बैठक में भी सुरक्षा और आपसी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी।
- मिस्र के अधिकारियों ने साफ किया कि खाड़ी देशों का हित ही उनके देश का हित है।




