ईरान की राजधानी तेहरान में बड़े धमाके, ट्रंप ने दिया जंग खत्म करने का संकेत लेकिन रखी बड़ी शर्त
ईरान की राजधानी तेहरान के मध्य इलाके में 1 अप्रैल 2026 को कई तेज धमाकों की आवाज़ सुनी गई जिससे शहर में हड़कंप मच गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार इन धमाकों के बाद राजधानी के कुछ हिस्सों में बिजली गुल हो गई और सुरक्षा के मद्देनजर हवाई रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर दिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच सैन्य संघर्ष पिछले पांच हफ्तों से लगातार जारी है।
जंग के बीच ईरान और कुवैत में क्या हुआ?
- तेहरान में धमाकों के बाद Fars news agency ने कई इलाकों में बिजली कटौती की जानकारी दी है।
- Kuwait International Airport के फ्यूल टैंक में ईरानी ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
- IRGC ने Microsoft, Google और Apple समेत 18 अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है और कर्मचारियों को दफ्तर छोड़ने को कहा है।
- लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्से में हुए इज़राइली हमलों में सात लोगों की जान जाने की खबर है।
- अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ दिन इस युद्ध के लिए बहुत निर्णायक साबित होंगे।
अमेरिका की वापसी की शर्त और शांति प्रस्ताव पर अपडेट
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान अगले दो से तीन हफ्तों में खत्म हो सकता है। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका जल्द ही अपनी सेनाएं वापस बुला लेगा लेकिन इसके लिए उन्होंने एक बड़ी शर्त रखी है। ट्रंप के मुताबिक ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अपनी क्षमता को पूरी तरह खत्म करना होगा ताकि वह भविष्य में खतरा न बन सके। उन्होंने कहा कि ईरान के पास समझौता करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।
दूसरी तरफ इस युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास शुरू हो गए हैं। China और Pakistan ने मिलकर एक पांच सूत्री शांति प्रस्ताव पेश किया है जिसमें दोनों पक्षों से तुरंत जंग रोकने और बातचीत शुरू करने की अपील की गई है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने बताया कि उन्हें अमेरिकी दूत के जरिए संदेश मिले हैं लेकिन अभी आधिकारिक तौर पर बातचीत शुरू नहीं हुई है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि इसका सीधा असर उड़ानों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ रहा है।




