अमेरिका और NATO के बीच बढ़ी तल्खी, मार्को रूबियो ने कहा ईरान युद्ध के बाद गठबंधन पर होगा दोबारा विचार
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के खत्म होने के बाद वाशिंगटन NATO के साथ अपने रिश्तों पर फिर से विचार कर सकता है। उन्होंने Fox News को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि युद्ध समाप्त होने के बाद इस साझेदारी का दोबारा आकलन करने की जरूरत होगी। Rubio का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति Donald Trump भी NATO सहयोगियों की आलोचना कर रहे हैं।
अमेरिका क्यों कर रहा है NATO से अलग होने की बात?
मार्को रूबियो ने गठबंधन की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि NATO सहयोगी देश जरूरत पड़ने पर अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने से मना करते हैं, तो यह गठबंधन एक तरफा रास्ता बन जाता है। हाल ही में स्पेन जैसे देशों ने अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र और सैन्य अड्डों का उपयोग करने से रोक दिया था। रूबियो ने साफ कहा कि अगर गठबंधन अमेरिका को अपनी शक्ति दिखाने में मदद नहीं कर सकता, तो इसकी वैल्यू को बहुत सावधानी से परखना होगा।
ईरान युद्ध के ताजा हालात और कुवैत पर प्रभाव
ईरान के साथ चल रहा यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह युद्ध अब अपने अंतिम चरण में है और अगले दो से चार हफ्तों में समाप्त हो सकता है। इस क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों पर पड़ा है। कुवैत में भी सुरक्षा व्यवस्था सख्त है क्योंकि हाल ही में एक प्लांट पर हुए हमले में एक भारतीय कर्मचारी की जान चली गई थी।
| विषय | मुख्य जानकारी |
|---|---|
| युद्ध की शुरुआत | 28 फरवरी 2026 |
| अनुमानित समाप्ति | अगले 2 से 3 सप्ताह में |
| कुवैत हवाई क्षेत्र | 28 फरवरी से पूरी तरह बंद |
| प्रमुख मांग | सैन्य ठिकानों तक पहुंच की अनुमति |
NATO और ट्रंप प्रशासन का अगला कदम
राष्ट्रपति Donald Trump ने उन NATO देशों की आलोचना की है जो स्वेज नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के अमेरिकी प्रयासों में मदद नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन के करीबी सलाहकार अब गठबंधन विरोधी रुख को बढ़ावा दे रहे हैं। दूसरी ओर, NATO महासचिव Mark Rutte ने इन चिंताओं को कम करने की कोशिश की है और अमेरिका की गठबंधन के प्रति प्रतिबद्धता पर भरोसा जताया है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है और सीधे बैठक की संभावना भी बनी हुई है।




