Trump on Iran War: ट्रंप ने कहा ईरान में सैन्य लक्ष्य पूरा होने के करीब, अगले कुछ हफ्तों तक जारी रहेगी बमबारी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की है कि ईरान में चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान ‘Operation Epic Fury’ के लक्ष्य जल्द ही पूरे होने वाले हैं। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल करने के बेहद करीब पहुंच गया है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया है कि आने वाले दो से तीन हफ्तों तक ईरान पर हमले और भी तेज किए जाएंगे। राष्ट्रपति के अनुसार, अमेरिका तब तक हमला जारी रखेगा जब तक वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाता।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और अमेरिका के मुख्य उद्देश्य
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस सैन्य अभियान के पीछे अमेरिका ने कई बड़े कारण बताए थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे ईरान की मिसाइल क्षमताओं और उत्पादन इकाइयों को पूरी तरह नष्ट करना चाहते हैं। इसके अलावा, ईरानी नौसेना को खत्म करना और यह सुनिश्चित करना कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके, इस ऑपरेशन के प्राथमिक लक्ष्यों में शामिल है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों का मानना है कि सैन्य स्तर पर लगभग सभी जरूरी लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं।
युद्ध के अब तक के हालात और प्रभाव
इस संघर्ष की वजह से मिडिल ईस्ट के देशों में रहने वाले लोगों और प्रवासी कामगारों पर भी असर पड़ा है। युद्ध की वर्तमान स्थिति को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| ऑपरेशन की शुरुआत | 28 फरवरी 2026 |
| कुल मौतें | 5,000 से अधिक |
| नागरिक मौतें | 2,200 से अधिक |
| विस्थापित लोग | लगभग 32 लाख (ईरानी) |
| प्रमुख सहयोगी देश | Israel और Saudi Arabia |
सीजफायर की शर्तें और हॉर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका इस युद्ध से बहुत जल्द बाहर निकल जाएगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर दोबारा हमला करने की क्षमता बनाए रखेगा। उन्होंने युद्ध रोकने के लिए एक बड़ी शर्त रखी है कि Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से पूरी तरह खोल दिया जाए। वर्तमान में ईरान ने यहाँ से गुजरने वाले रास्ते को सीमित कर रखा है। दूसरी तरफ, ईरान ने ट्रंप के उस दावे को पूरी तरह से गलत बताया है जिसमें कहा गया था कि ईरान ने खुद युद्ध रोकने की अपील की है। ट्रंप ने NATO देशों के साथ भी नाराजगी जताई है क्योंकि उनके अनुसार कई सहयोगी देशों ने इस युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया।




