ट्रंप की ईरान को सीधी चेतावनी, कहा परमाणु ठिकानों पर है सैटेलाइट की नज़र और किसी भी हरकत पर होगी मिसाइल स्ट्राइक
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान के बीच एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान के सभी परमाणु ठिकाने अब सैटेलाइट के जरिए कड़ी निगरानी में रखे जा रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, इन ठिकानों पर होने वाली किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि का जवाब विनाशकारी मिसाइल हमलों से दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को लेकर क्या दावे किए हैं?
Donald Trump ने अपनी हालिया स्पीच में बताया कि उन्हें ईरान के यूरेनियम भंडार की ज्यादा परवाह नहीं है क्योंकि वह जमीन में काफी गहराई में दबा हुआ है और उसकी मॉनिटरिंग सैटेलाइट से की जा सकती है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के राष्ट्रपति ने युद्धविराम की मांग की है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे पूरी तरह से झूठा करार दिया है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके। इसके साथ ही ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगले दो से तीन हफ्तों तक ईरान पर और भी जोरदार हमले किए जा सकते हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष की मुख्य जानकारियां
इस पूरे मामले में अब तक कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं जो पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं। खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है।
- अमेरिकी सेना के अनुसार ‘Operation Epic Fury’ के तहत अब तक ईरान के 12,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
- ईरान ने पलटवार करते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं।
- हाल ही में UAE ने ईरान की तरफ से आने वाली 5 बैलिस्टिक मिसाइलों और 35 ड्रोनों को हवा में ही नष्ट किया है।
- IAEA के डायरेक्टर ने बताया है कि उन्हें फिलहाल ईरान में किसी संगठित परमाणु हथियार कार्यक्रम के सबूत नहीं मिले हैं।
- अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार जून 2025 में हुए हमलों में ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम काफी हद तक तबाह हो चुका था।
क्या बातचीत के जरिए समाधान निकल सकता है?
अमेरिका ने ईरान के सामने 15 सूत्रीय योजना रखी है जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और परमाणु कार्यक्रम को पीछे हटाने की शर्तें शामिल हैं। हालांकि, ईरान ने फिलहाल इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि वे धमकियों और समय सीमा वाली भाषा में बात नहीं करेंगे। वहीं, परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है ताकि आम लोगों को इस सैन्य टकराव से बचाया जा सके।




