Iran की वजह से दुनिया की आर्थिक स्थिरता को खतरा, EU और ब्रिटिश प्रधानमंत्री के बीच हुई बड़ी बातचीत
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen और ब्रिटिश प्रधानमंत्री Keir Starmer ने हाल ही में फोन पर बातचीत की। इस दौरान मध्य पूर्व और Strait of Hormuz के हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। Ursula von der Leyen ने सोशल मीडिया पर बताया कि Iran की कार्रवाइयों से पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता खतरे में पड़ रही है। दोनों नेता अब अपने सहयोगियों के साथ मिलकर समुद्री रास्तों में सुरक्षित आवाजाही को फिर से बहाल करने के लिए काम करेंगे।
समुद्री रास्ते को लेकर ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की क्या है योजना?
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की है कि दोनों नेताओं ने समुद्री रास्ते में रुकावट पैदा करने वाली गतिविधियों की कड़ी निंदा की है। उनके अनुसार इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। ब्रिटेन इस हफ्ते लगभग 35 देशों की एक बैठक बुलाने की तैयारी कर रहा है, जिसकी अध्यक्षता विदेश सचिव Yvette Cooper करेंगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य Strait of Hormuz को व्यापार के लिए पूरी तरह से खोलने के लिए एक ठोस योजना तैयार करना है। प्रधानमंत्री Starmer ने साफ़ किया है कि वे ब्रिटेन के हितों की रक्षा करेंगे और किसी बड़े युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते।
वैश्विक स्तर पर इस तनाव का क्या प्रभाव पड़ रहा है?
- ईरान की कार्रवाइयों की वजह से तेल और गैस की सप्लाई पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।
- South Korea के राष्ट्रपति Lee Jae Myung ने आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए 17.1 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग की है।
- यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देशों ने साझा बयान जारी कर ईरान से हमले रोकने को कहा है।
- International Energy Agency ने बाजार की स्थिति सुधारने के लिए तेल के सुरक्षित भंडार का उपयोग करने की मंजूरी दी है।
- यूरोपीय परिषद ने सभी पक्षों से संयम बरतने और ऊर्जा शिपमेंट को स्थिर रखने की अपील की है।
- ईरान ने दावा किया है कि समुद्री रास्ता बंद नहीं है, लेकिन वहां निगरानी बढ़ा दी गई है।
ईरान और अन्य देशों के बीच बढ़ता तनाव
मार्च 2026 से ही कई देशों ने ईरान द्वारा जहाजों और बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे हमलों की आलोचना की है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने व्यापार, शिपिंग और वित्तीय सेवाओं के प्रमुखों के साथ भी बैठक की है ताकि आर्थिक गिरावट को रोका जा सके। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों का पालन करने पर जोर दे रहा है। हालांकि ईरान का कहना है कि क्षेत्र में बाहरी ताकतों की मौजूदगी के कारण वे जहाजों की कड़ी निगरानी कर रहे हैं। इस तनाव का सीधा असर उन देशों पर भी पड़ सकता है जो खाड़ी देशों से होने वाले व्यापार पर निर्भर हैं।




