Strait of Hormuz Closure: सऊदी और UAE बना रहे हैं नए पाइपलाइन रास्ते, तेल सप्लाई के लिए लिया बड़ा फैसला
खाड़ी देशों ने अपनी तेल सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए नए और वैकल्पिक रास्तों पर काम शुरू कर दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते में हो रही दिक्कतों को देखते हुए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात नए पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने की योजना बना रहे हैं। यह फैसला ईरान द्वारा समुद्री रास्ते में पैदा की गई रुकावटों के जवाब में लिया गया है ताकि दुनिया भर में तेल की कमी न हो और व्यापार सुचारू रूप से चलता रहे।
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हॉर्मुज के रास्ते को क्यों छोड़ना चाहते हैं खाड़ी देश?
पिछले एक महीने से हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार में भारी गिरावट आई है। ईरान द्वारा अमेरिका और इज़राइल से जुड़े टैंकरों को रोकने की वजह से इस रास्ते से होने वाले ट्रैफिक में 95 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सऊदी अरब और UAE के अधिकारियों का मानना है कि केवल एक रास्ते पर निर्भर रहना अब सुरक्षित नहीं है। सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर ने बताया कि कंपनी अब अपनी 1,200 किलोमीटर लंबी ‘ईस्ट-वेस्ट’ पाइपलाइन को मुख्य रास्ते के तौर पर इस्तेमाल कर रही है ताकि लाल सागर के जरिए तेल भेजा जा सके।
तेल सप्लाई के लिए कौन से नए विकल्प तैयार किए जा रहे हैं?
खाड़ी देश अब ऐसे रास्तों पर काम कर रहे हैं जो ज़मीन के ज़रिए सीधे बंदरगाहों तक पहुँचते हों। इसके लिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अपने पुराने पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स को तेज़ कर रहे हैं। इन नए रास्तों और मौजूदा क्षमताओं की जानकारी नीचे दी गई है:
| प्रोजेक्ट का नाम | वर्तमान क्षमता (बैरल प्रति दिन) | मुख्य पोर्ट/रास्ता |
|---|---|---|
| सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन | 70 लाख | यानबू पोर्ट (लाल सागर) |
| हबशान-फुजैराह पाइपलाइन (UAE) | 17 लाख | फुजैराह (ओमान की खाड़ी) |
| यानबू पोर्ट शिपमेंट (सऊदी) | 46 लाख | लाल सागर मार्ग |
| प्रस्तावित नया कॉरिडोर (IMEC) | चर्चा जारी | अरब प्रायद्वीप से भूमध्य सागर |
इन योजनाओं में कतर और इराक से सऊदी अरब होते हुए जॉर्डन और इज़राइल के हाइफा पोर्ट तक पाइपलाइन ले जाने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। सऊदी अरब के परिवहन मंत्री सालेह अल-जासेर ने कहा है कि उनका सिस्टम सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रहा है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट महंगे हैं और इन्हें पूरा होने में कई साल लग सकते हैं, लेकिन सुरक्षा के नज़रिए से ये बेहद ज़रूरी हैं।




