Strait of Hormuz: रूस के लिए खुला रहेगा रास्ता, ईरान और ओमान बना रहे हैं नया नियम, जहाजों की सुरक्षा पर हुई बड़ी चर्चा.
रूस और ईरान के बीच रणनीतिक जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को लेकर बड़ी बातचीत हुई है। पुतिन के करीबी अधिकारी यूरी उशाकोव ने साफ़ किया है कि यह समुद्री रास्ता रूस के लिए खुला है। वहीं ईरान और ओमान मिलकर जहाजों की आवाजाही के लिए एक नया नियम तैयार कर रहे हैं ताकि सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके। रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों ने फोन पर इस मुद्दे पर लंबी चर्चा की है।
रूस और ईरान के बीच क्या बातचीत हुई?
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ फोन पर चर्चा की है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। क्रेमलिन के सलाहकार यूरी उशाकोव ने रूसी सरकारी टीवी पर पुष्टि की कि उनके लिए यह रास्ता पूरी तरह खुला है। ईरान ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चल रही चर्चाओं और क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशों पर अपना पक्ष रखा है।
ईरान और ओमान का नया समुद्री नियम क्या है?
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने बताया कि ओमान के साथ मिलकर एक नए प्रोटोकॉल का मसौदा तैयार किया जा रहा है। इस नए नियम के तहत कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:
- युद्ध जैसी स्थिति में सामान्य शांति काल के नियम लागू नहीं होंगे।
- हमलावर देशों और उनके सहयोगियों के जहाजों को इस रास्ते से निकलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
- नए नियम का मकसद जहाजों को रोकना नहीं बल्कि बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा देना है।
- सामान्य हालातों में जहाजों को ईरान और ओमान दोनों के अधिकारियों से तालमेल बिठाना होगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे का क्या असर है?
| देश/संस्था | प्रमुख बयान या स्थिति |
|---|---|
| GCC | रास्ता खुलवाने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की मांग की। |
| अमेरिका | कहा कि कोई भी देश दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक नहीं बना सकता। |
| फ्रांस | सैन्य ऑपरेशन के जरिए रास्ता खोलने की बात को अव्यावहारिक बताया। |
| ब्रिटेन | करीब 40 देशों के साथ मिलकर रास्ता खोलने के विकल्पों पर चर्चा की। |
| रूस | ईरान की नाकेबंदी का विरोध किया लेकिन पूरी स्थिति को वैश्विक संदर्भ में देखने की सलाह दी। |
ईरान के राजदूत काज़ेम जलाली ने भी स्पष्ट किया है कि स्थाई शांति के लिए ईरान के कानूनी अधिकार का सम्मान करना जरूरी है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर चेतावनी दी है और रास्ता खोलने को किसी भी समझौते की शर्त बताया है। इस पूरे मामले पर दुनिया के कई देशों की नजर बनी हुई है क्योंकि यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।




