Strait of Hormuz News: भारत ने ब्रिटेन के साथ की बड़ी बैठक, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए उठाया बड़ा कदम.
भारत सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है और ब्रिटेन की अगुवाई में हुई एक बड़ी बैठक में हिस्सा लिया है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा सबसे ऊपर है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण इस रास्ते से गुजरना मुश्किल हो गया है। भारत लगातार ईरान और अन्य देशों के संपर्क में है ताकि तेल और गैस लेकर आने वाले जहाजों को कोई खतरा न हो।
बैठक में भारत का रुख और सुरक्षा से जुड़े बड़े अपडेट
विदेश सचिव Vikram Misri ने इस वर्चुअल बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर ज़ोर दिया। भारत का कहना है कि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से बिना किसी रुकावट के होनी चाहिए। भारत इस रास्ते का इस्तेमाल मुख्य रूप से रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) मंगाने के लिए करता है।
- भारत के 6 जहाजों ने हाल ही में बातचीत के बाद सुरक्षित तरीके से इस रास्ते को पार किया है।
- बैठक में दुनिया के करीब 40 से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया, जिसमें कनाडा, जापान और UAE शामिल थे।
- अमेरिका इस विशेष बैठक में शामिल नहीं था, जिसका नेतृत्व ब्रिटेन ने किया था।
- भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसने खाड़ी में जहाजों पर हुए हमलों में अपने नाविकों को खोया है।
आम आदमी और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
यह खबर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बहुत अहम है। Strait of Hormuz एक ऐसा रास्ता है जहां से भारत की ऊर्जा ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आता है। अगर यहाँ जहाजों का आना-जाना बंद होता है, तो भारत में गैस और तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। सरकार ने साफ़ किया है कि वे ईरान और अन्य क्षेत्रीय देशों के संपर्क में हैं ताकि अपने जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता पक्का कर सकें।
MEA के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने बताया कि भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत खुले समुद्री व्यापार का समर्थन करता है। ईरान ने भारत को उन ‘दोस्त देशों’ की लिस्ट में रखा है जिन्हें इस रास्ते से जाने की अनुमति है। इससे खाड़ी देशों और भारत के बीच होने वाले व्यापार को सुरक्षित रखने में काफी मदद मिलेगी और वहां रहने वाले भारतीयों के लिए भी स्थिति सामान्य बनी रहेगी।




