ईरान के राष्ट्रपति का बड़ा बयान, अमेरिका और इसराइल की हरकत पर दी चेतावनी, 2000 लोगों की मौत कन्फर्म.
ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच तनाव काफी बढ़ गया है और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कर दिया है कि उनका देश अपनी रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। पिछले पांच हफ्तों से चल रही इस जंग में स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 2,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ईरान का कहना है कि वह अपनी सीमाओं और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान ने समुद्री रास्ते को लेकर क्या नियम बनाए हैं?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का रास्ता सभी देशों के लिए बंद नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि केवल उन जहाजों को रोका जा रहा है जिनका संबंध अमेरिका या इसराइल से है। भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों के जहाजों को इस रास्ते से सुरक्षित आने-जाने की पूरी अनुमति दी गई है। ईरान का दावा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपनी समुद्री सीमा की सुरक्षा कर रहा है ताकि आगे होने वाले हमलों को रोका जा सके।
अब तक के संघर्ष और बातचीत का मुख्य विवरण
ईरान के राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि जब अमेरिका ने हमले शुरू किए, तब ईरान शांति के लिए बातचीत कर रहा था। अब ईरान ने मांग की है कि जब तक भविष्य में हमले न करने की ठोस गारंटी नहीं मिलती, तब तक स्थिति सामान्य होना मुश्किल है। इस संघर्ष से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे टेबल में दी गई हैं:
| तारीख | अहम जानकारी |
|---|---|
| 3 अप्रैल 2026 | राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अज़रबैजान के राष्ट्रपति से सुरक्षा पर चर्चा की। |
| 2 अप्रैल 2026 | ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी जनता को पत्र लिखकर सच्चाई जानने की अपील की। |
| 1 अप्रैल 2026 | ईरान ने शांति के लिए ‘ठोस गारंटी’ की शर्त रखी। |
| 26 मार्च 2026 | भारत और अन्य मित्र देशों को सुरक्षित समुद्री मार्ग का आश्वासन दिया गया। |
| 15 मार्च 2026 | अमेरिकी और इसराइली जहाजों के प्रवेश पर रोक की पहली घोषणा हुई। |
ईरान ने साफ किया है कि वह कभी भी युद्ध की शुरुआत नहीं करता है, लेकिन हमला होने पर चुप भी नहीं बैठेगा। विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र को भी सूचित किया है कि समुद्री रास्ते में पैदा हुई अस्थिरता का मुख्य कारण अमेरिका और इसराइल की नीतियां हैं। ईरान अब अपनी पूरी क्षमता का उपयोग अपनी रक्षा में करने की बात कह रहा है।




