ट्रंप की ‘स्टोन एज’ वाली धमकी पर ईरान का पलटवार, कहा यह युद्ध अपराध है, कुवैत में भी हुआ हमला
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी का कड़ा जवाब दिया है जिसमें ईरान को ‘पत्थर युग’ में भेजने की बात कही गई थी. मसूद ने इसे युद्ध अपराध करने की मंशा बताया है और कहा है कि दुनिया को इस पर चुप नहीं रहना चाहिए. इस तनाव के बीच खाड़ी देशों में भी हमलों की खबर आई है जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और क्षेत्र में डर का माहौल बना हुआ है.
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ट्रंप की डेडलाइन और ईरान का खुला पत्र
ट्रंप ने 6 अप्रैल 2026 तक ईरान को समझौता करने का समय दिया है और ऐसा न होने पर बिजली घरों और पुलों को उड़ाने की बात कही है. इसके जवाब में ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी लोगों को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या मासूमों का कत्लेआम और अस्पतालों पर बमबारी करना अमेरिका के हित में है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी तंज कसते हुए कहा कि जिस पत्थर युग की बात ट्रंप कर रहे हैं उस समय मिडिल ईस्ट में तेल या गैस नहीं हुआ करती थी.
खाड़ी देशों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है
अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का मानना है कि नागरिक सुविधाओं जैसे पावर प्लांट पर हमला करना पूरी तरह से गलत है. स्टैनफोर्ड और अमेरिकन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के अनुसार ऐसे हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं. हालिया घटनाओं के दौरान ईरान ने कुवैत की रिफाइनरी और वाटर प्लांट पर मिसाइलें दागी हैं जिससे वहां नुकसान हुआ है. इस तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों और खाड़ी में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है.
| मुख्य जानकारी | विवरण |
|---|---|
| ताारीख | 3 अप्रैल 2026 |
| ट्रंप की धमकी | ईरान को पत्थर युग में भेजने की चेतावनी |
| ईरान का पक्ष | इसे युद्ध अपराध करार दिया |
| खाड़ी में असर | कुवैत की रिफाइनरी और वाटर प्लांट पर हमला |
| ट्रंप की डेडलाइन | 6 अप्रैल तक समझौता करने का अल्टीमेटम |
ईरानी जनरल मसूद मूसावी ने कहा है कि अमेरिका को अपनी सोच बदलनी चाहिए क्योंकि ईरान का इतिहास 6,000 साल पुराना है. वहीं दूसरी तरफ पूर्व राजनयिक मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने युद्ध रोकने के लिए कुछ शर्तें भी पेश की हैं ताकि आगे होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सके. इस युद्ध की वजह से कुवैत जैसे देशों में भी अब रिफाइनरी को निशाना बनाया जा रहा है जो खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी चिंता का विषय है.




