तेहरान की Shahid Beheshti University पर हुआ हमला, अमेरिका और इसराइल के बीच तनाव बढ़ा, गल्फ देशों में अलर्ट जारी.
ईरान की राजधानी तेहरान में शुक्रवार 3 अप्रैल 2026 को बड़ा हमला हुआ है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार उत्तर तेहरान में स्थित Shahid Beheshti University और मेहराबाद एयरपोर्ट के पास के इलाकों को निशाना बनाया गया है. इस हमले का आरोप अमेरिका और इसराइली सेना पर लगाया गया है. इस घटना के बाद से पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
ईरान की यूनिवर्सिटी पर हमले के बाद क्या हैं ताजा हालात?
ईरान के सरकारी टीवी ने जानकारी दी है कि इन हमलों से शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी और पूर्वी तेहरान के कुछ हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस हमले को एक बड़ा युद्ध अपराध करार दिया है. ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि वे इसका बदला जरूर लेंगे.
- ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने कहा है कि अगर हमले नहीं रुके तो वे क्षेत्र में अमेरिकी और इसराइली यूनिवर्सिटी को निशाना बनाएंगे.
- ईरान ने साफ किया है कि उनके ठिकानों पर किसी भी हमले का जवाब पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी संपत्तियों पर हमला करके दिया जाएगा.
- दुनिया भर के शिक्षाविदों ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वे ईरान के उच्च शिक्षा केंद्रों पर हो रहे इन हमलों की निंदा करें.
क्षेत्र के अन्य देशों और इसराइल पर क्या हुआ असर?
पिछले 24 घंटों में इस युद्ध का असर खाड़ी के अन्य देशों जैसे यूएई और कुवैत पर भी देखने को मिला है. यूएई ने दावा किया है कि उसने ईरान की तरफ से दागी गई कई मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराया है. इस टकराव से खाड़ी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी चिंता बढ़ गई है क्योंकि सुरक्षा कारणों से यात्रा और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है.
| देश | अपडेट और घटना |
|---|---|
| Israel | मिसाइल हमलों में 148 लोग घायल हुए और स्टील उत्पादन 70% तक प्रभावित हुआ. |
| UAE | 18 बैलिस्टिक मिसाइल, 4 क्रूज मिसाइल और 47 ड्रोन्स को इंटरसेप्ट किया गया. |
| Kuwait | पानी के प्लांट और तेल रिफाइनरी पर हमले की खबर दी गई. |
| Iran | दावा किया गया कि एक अमेरिकी फाइटर जेट को मार गिराया गया है. |
ईरान के विज्ञान और स्वास्थ्य मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस गंभीरता को समझें. वहीं इसराइल का कहना है कि उसने केवल उन ठिकानों को निशाना बनाया है जिनका इस्तेमाल सैन्य रिसर्च के लिए किया जा रहा था. क्षेत्र में तनाव को देखते हुए कई देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.




