ईरान ने इसराइल और खाड़ी देशों पर दागी मिसाइलें, कुवैत की रिफाइनरी में लगी आग, इसराइल का एयर डिफेंस सक्रिय.
ईरान और इसराइल के बीच चल रहा तनाव अब और भी खतरनाक मोड़ पर आ गया है। 3 अप्रैल 2026 को ईरान की तरफ से इसराइल के रिहायशी इलाकों और खाड़ी देशों के तेल प्रतिष्ठानों पर कई मिसाइलें दागी गई हैं। इस हमले के बाद इसराइल ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है और कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है। इस टकराव का सीधा असर तेल की कीमतों और खाड़ी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर पड़ने की आशंका है।
हमले में कहां कितना नुकसान हुआ और कौन से इलाके प्रभावित हुए?
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने तेल अवीव और बंदरगाह शहर आयलात को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली है। इसराइल के मध्य हिस्से में एक मिसाइल के सीधे गिरने से घर, सड़कें और कारें तबाह हो गई हैं। तेल अवीव के एक रेलवे स्टेशन पर भी मिसाइल का मलबा गिरने से नुकसान की खबर है। हमले की चपेट में सिर्फ इसराइल ही नहीं, बल्कि कुछ पड़ोसी खाड़ी देश भी आए हैं।
- कुवैत की मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी में मिसाइल गिरने से भीषण आग लग गई है।
- अबू धाबी ने मिसाइल के मलबे से होने वाले खतरे को देखते हुए अपने हबशान गैस प्लांट को बंद कर दिया है।
- तेहरान के पास एक मुख्य पुल पर हुए हमले में कम से कम 8 लोगों की जान चली गई है और 95 लोग घायल हुए हैं।
- इसराइल की सेना ने लेबनान में भी भारी कार्रवाई की है और कई कमांडरों को मारने का दावा किया है।
इसराइल और अमेरिका का क्या है अगला कदम?
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान के सैन्य ढांचे और उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने के लिए हमले जारी रखेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को 6 अप्रैल की रात 8 बजे तक का समय दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को जहाजों के लिए नहीं खोला, तो अमेरिका उसके बिजली घरों को निशाना बनाएगा।
| देश | मुख्य घटना | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| इसराइल | मिसाइल हमला | एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव |
| कुवैत | रिफाइनरी में आग | नुकसान का आंकलन जारी |
| UAE | गैस प्लांट बंद | मिसाइल इंटरसेप्ट की गई |
| ईरान | स्टील प्रोडक्शन पर हमला | 70% उत्पादन क्षमता प्रभावित |
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे पर चर्चा होने वाली है, जहां बहरीन ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है। इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण मिडिल ईस्ट के हवाई और समुद्री रास्तों पर यात्रा करने वाले प्रवासियों के लिए जोखिम बढ़ गया है और तेल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।




