USS Abraham Lincoln और ईरान के बीच समुद्री तनाव बढ़ा, अमेरिकी नौसेना ने जारी की ताज़ा स्थिति, रिटायरमेंट की खबरों का सच आया सामने.
मध्य पूर्व के समुद्र में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हलचल काफी तेज हो गई है. सोशल मीडिया पर चल रही कुछ रिपोर्ट्स के बीच अमेरिकी नौसेना ने स्पष्ट किया है कि उनकी मौजूदगी इस क्षेत्र में और भी मजबूत हुई है. खबरों में दावा किया गया था कि अमेरिकी युद्धपोत वहां से वापस लौट रहे हैं, लेकिन रक्षा सूत्रों के अनुसार हालात इसके बिल्कुल अलग हैं. इस समय अरब सागर और उसके आसपास के इलाकों में अमेरिकी बेड़े की सक्रियता पहले से ज्यादा देखी जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया है.
USS Abraham Lincoln को लेकर क्या है आधिकारिक जानकारी?
- USS Abraham Lincoln (CVN-72) एक एक्टिव विमान वाहक पोत है और यह वर्तमान में भी नौसेना की सेवा में पूरी तरह तैनात है.
- मार्च 2026 में अमेरिकी सेना ने इस युद्धपोत की नई तस्वीरें जारी की हैं जो इसकी सक्रिय स्थिति को पुख्ता करती हैं.
- साल 2024 में इस जहाज पर जो रिटायरमेंट प्रोग्राम आयोजित हुआ था, वह केवल व्यक्तिगत कर्मियों के लिए था न कि पूरे जहाज को रिटायर करने के लिए.
- अमेरिकी नेवी का USS Nimitz जहाज रिटायरमेंट की लिस्ट में शामिल है, जिसका USS Abraham Lincoln की वर्तमान स्थिति से कोई संबंध नहीं है.
- हाल ही में इस युद्धपोत पर उड़ान संचालन के दौरान एक अमेरिकी नाविक के घायल होने की खबर भी आई थी, जो इसके लगातार ऑपरेशनल होने की पुष्टि करती है.
ईरान के आसपास अमेरिकी सेना की वर्तमान ताकत और स्थिति
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 तक ईरान के पास के समुद्री इलाकों में कम से कम 10 अमेरिकी युद्धपोत तैनात थे. इनमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमान वाहक पोत USS Abraham Lincoln और कई अन्य गाइडेड मिसाइल विध्वंसक जहाज शामिल हैं. पेंटागन अब क्षेत्र में एक और दूसरे विमान वाहक पोत USS George H. W. Bush को भेजने पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है. हालांकि फरवरी के अंत में कुछ ईरानी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि अमेरिकी जहाज पीछे हट रहे हैं, लेकिन अमेरिकी कमांड ने इन दावों को गलत बताते हुए अपनी उपस्थिति को लगातार बरकरार रखा है. खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और यात्रा करने वालों के लिए समुद्री सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है क्योंकि इससे व्यापारिक मार्ग और उड़ानों पर सीधा असर पड़ता है.




