ईरान का बड़ा आरोप, अमेरिका और इसराइल ने नागरिक विमान पर हमला कर तोड़ा अंतरराष्ट्रीय कानून, भारत जानी थी फ्लाइट
ईरान की मानवाधिकार परिषद ने अमेरिका और इसराइल की ओर से एक नागरिक विमान पर किए गए हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है. मशहद एयरपोर्ट पर हुए इस हमले के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है और इसे युद्ध अपराध करार दिया है. यह विमान नई दिल्ली के लिए मानवीय सहायता और दवाएं लेकर जाने वाला था लेकिन हमले की वजह से इसे काफी नुकसान पहुंचा है.
किन नियमों का हुआ उल्लंघन और क्या है विशेषज्ञों की राय?
ईरानी अधिकारियों और नागरिक उड्डयन संगठन के अनुसार नागरिक विमानों को निशाना बनाना जिनेवा कन्वेंशन और शिकागो कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के खिलाफ है. 100 से भी ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें इस सैन्य अभियान को अवैध बताया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना इस तरह की सैन्य कार्रवाई करना अंतरराष्ट्रीय चार्टर के नियमों का अपमान है. येल लॉ स्कूल के जानकारों ने भी इस हमले पर चिंता जताई है.
घटना से जुड़ी मुख्य तारीखें और जरूरी जानकारी
इस पूरे मामले में कई अहम मोड़ आए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी जांच की मांग की जा रही है. ईरान ने कहा है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए हर मुमकिन कदम उठाएगा.
| तारीख | मुख्य घटना |
|---|---|
| 28 फरवरी 2026 | सैन्य अभियान की शुरुआत हुई |
| 30 मार्च 2026 | मशहद एयरपोर्ट पर नागरिक विमान पर हमला हुआ |
| 1 अप्रैल 2026 | विमान को भारत के लिए उड़ान भरनी थी |
| 3 अप्रैल 2026 | कानून विशेषज्ञों ने हमले की निंदा करते हुए पत्र जारी किया |
| 4 अप्रैल 2026 | ईरान की राइट्स काउंसिल ने इसे कानून का उल्लंघन घोषित किया |
ईरानी राजदूत अली बहरीनी ने कहा है कि पश्चिमी ताकतें नागरिक संपत्तियों को होने वाले नुकसान को नजरअंदाज कर रही हैं. हमले की चपेट में आया विमान पूरी तरह से मानवीय मदद के लिए इस्तेमाल हो रहा था और इसका सैन्य गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं था. ईरान अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.




