Iran में Red Crescent के कर्मचारी की मौत, इसराइल और अमेरिका पर लगा हमले का आरोप, राहत कार्यों पर बढ़ा खतरा.
Iran के Isfahan शहर में Red Crescent के एक मानवीय सहायता कर्मचारी की मौत की दुखद खबर सामने आई है. Fars News Agency की रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला Mobarakeh इलाके में हुआ, जिसमें अमेरिका और इसराइल के हवाई हमलों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है. पिछले एक महीने से Iran में चल रहे संघर्ष के कारण आम जनता के साथ-साथ राहत और बचाव कार्य में जुटे लोगों की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है. International Federation of Red Cross and Red Crescent Societies (IFRC) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मानवीय कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की मांग की है.
Iran में संघर्ष और मानवीय नुकसान से जुड़े मुख्य आंकड़े
Iran में पिछले कुछ हफ्तों से जारी संघर्ष में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है. IFRC और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार मानवीय सहायता के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है.
- 4 अप्रैल 2026 तक Iran में संघर्ष के दौरान 1,900 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.
- करीब 20,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं और अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है.
- WHO ने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर अब तक 20 से अधिक हमलों की पुष्टि की है.
- 24 मार्च तक 22 चिकित्सा कर्मियों की जान जाने की जानकारी सामने आई थी.
- Red Crescent सोसाइटी के प्रमुख ने युद्ध अपराधों की जांच के लिए ICC से औपचारिक अनुरोध किया है.
ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले Red Crescent के प्रमुख सदस्य
सेवा और राहत कार्यों के दौरान अपनी जान गंवाने वाले कर्मियों की सूची काफी लंबी होती जा रही है. Isfahan और इसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा की स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है. नीचे दी गई तालिका में हाल ही में शहीद हुए कुछ प्रमुख राहत कर्मियों का विवरण है:
| नाम | तारीख | स्थान/प्रांत |
|---|---|---|
| Hamidreza Jahanbakhsh | 8 मार्च 2026 | Tiran-o-Korun, Isfahan |
| Somayeh Mir Abo Eshagh | 27 मार्च 2026 | Khansar, Isfahan |
| Alireza Sohbatloo | 2 अप्रैल 2026 | Zanjan |
| अज्ञात कर्मचारी | 4 अप्रैल 2026 | Mobarakeh, Isfahan |
IFRC का कहना है कि Red Crescent का प्रतीक शांति और मानवता का संकेत है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा प्राप्त है. सहायता कर्मियों पर हमले न केवल नैतिक रूप से गलत हैं बल्कि यह जीवन रक्षक सेवाओं को भी पूरी तरह से बाधित कर रहे हैं.




