ईरान में परमाणु हमले का खतरा, UAE और कुवैत समेत खाड़ी देशों की बढ़ी टेंशन, भारत से मंगाई जा रही रेडिएशन की दवा
ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अब खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है। अगर ईरान के परमाणु केंद्रों पर कोई हमला होता है, तो इसका असर UAE, कुवैत, कतर और बहरीन पर बहुत बुरा पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि रेडिएशन के खतरे को देखते हुए कई देशों ने भारत से एंटी-रेडिएशन दवाएं मंगाना शुरू कर दिया है। यह स्थिति क्षेत्र में रहने वाले लाखों प्रवासियों और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
खाड़ी देशों को परमाणु दुर्घटना से क्या खतरा है?
खाड़ी देश अपनी पीने के पानी की जरूरतों के लिए पूरी तरह से समुद्र के पानी को साफ करने (Desalination) वाली तकनीक पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान के बुशेहर जैसे तटीय परमाणु संयंत्र में कोई रिसाव होता है, तो समुद्री पानी रेडियोधर्मी हो सकता है। इससे इन देशों का वाटर सप्लाई सिस्टम पूरी तरह ठप हो जाएगा। इसके अलावा हवा के साथ फैलने वाले कण सऊदी अरब, ओमान और इराक तक पहुंच सकते हैं।
भारत से कौन सी दवाएं मंगाई जा रही हैं?
रेडिएशन के संभावित खतरे से बचने के लिए बहरीन, कतर, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों ने भारत से विशेष दवाओं की खेप मांगी है। चंडीगढ़ स्थित एक दवा कंपनी ने ऐसी दवाएं विकसित की हैं जो शरीर पर रेडिएशन के असर को कम करती हैं। निम्नलिखित तालिका में इससे जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है:
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
|---|---|
| दवा का नाम | प्रुशियन ब्लू कैप्सूल और पोटेशियम आयोडाइड |
| स्रोत देश | भारत (चंडीगढ़ स्थित कंपनी) |
| प्रभावी देश | UAE, बहरीन, कुवैत और कतर |
| चेतावनी जारी करने वाली संस्था | IAEA और WHO |
अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और अधिकारियों का क्या कहना है?
- संयुक्त राष्ट्र (UN) ने परमाणु संयंत्रों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकियों पर गहरी चिंता जताई है।
- WHO के महानिदेशक ने कहा है कि परमाणु दुर्घटना का स्वास्थ्य पर असर पीढ़ियों तक बना रह सकता है।
- ईरान के परमाणु ऊर्जा प्रमुख ने चेतावनी दी है कि हमलों के परिणाम पड़ोसी देशों के लिए अटल और विनाशकारी होंगे।
- IAEA नतान्ज़ और अन्य परमाणु सुविधाओं में रेडिएशन स्तर की लगातार निगरानी कर रहा है।




