Trump की ईरान को बड़ी चेतावनी, आज रात 8 बजे तक का समय, बोले- बात नहीं मानी तो उड़ा देंगे बिजली घर और पुल.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बुडापेस्ट में एक बयान देते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान में अपने सैन्य उद्देश्यों को काफी हद तक पूरा कर लिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें आज रात 8 बजे की समय सीमा पर टिकी हैं, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जवाब देने के लिए दी है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भी यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि तनाव बढ़ने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
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ट्रंप की चेतावनी और ईरान की जवाबी कार्रवाई
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के पास युद्ध विराम प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए आज रात 8 बजे तक का ही समय है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर शर्तें नहीं मानी गईं तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि पूरे देश को एक ही रात में निशाना बनाया जा सकता है। दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका के 45 दिनों के युद्ध विराम प्रस्ताव को मानने से मना कर दिया है और अपनी नई 10 शर्तें सामने रखी हैं। ईरान का कहना है कि वह स्थायी शांति चाहता है और उस पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं।
युद्ध में अब तक हुए नुकसान की पूरी जानकारी
इस जंग में अब तक बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई है। ईरान ने सऊदी अरब पर भी 7 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, जिन्हें हवा में ही मार गिराया गया। संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि आम जनता से जुड़े बिजली घरों या बुनियादी ढांचे पर हमला करना कानूनी रूप से गलत है।
| प्रभावित क्षेत्र | नुकसान का विवरण |
|---|---|
| ईरान | 1900 से अधिक मौतें और कई पुल नष्ट हुए |
| इजराइल | 1400 से ज्यादा लोगों की जान गई |
| अमेरिका | 13 सैन्य कर्मियों की मौत हुई |
| सऊदी अरब | मिसाइल हमलों से ऊर्जा केंद्रों के पास गिरा मलबा |
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baqaei ने कहा है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा और असामान्य हैं। तनाव को देखते हुए ईरान ने अपने नागरिकों और युवाओं से पावर प्लांट के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाने की अपील की है ताकि उन्हें संभावित अमेरिकी हमलों से बचाया जा सके। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं लेकिन फिलहाल कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिख रहा है।




