अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम का भारत ने किया स्वागत, पश्चिम एशिया में शांति की जगी उम्मीद.
भारत सरकार ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्ध विराम के समझौते का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार 8 अप्रैल 2026 को जारी बयान में कहा कि इस समझौते से पश्चिम एशिया में लंबे समय तक रहने वाली शांति का रास्ता खुलेगा। भारत ने साफ किया है कि तनाव कम करने के लिए कूटनीति और बातचीत ही सबसे सही रास्ता है क्योंकि इस युद्ध की वजह से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और व्यापार पर काफी बुरा असर पड़ा है।
समझौते की मुख्य बातें और अहम जानकारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बमबारी रोकने का ऐलान करते हुए इसे दोतरफा युद्ध विराम बताया है। ईरान ने भी इस शांति प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और इस्लामाबाद में बातचीत के लिए तैयार हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य जानकारी नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| युद्ध विराम की अवधि | दो सप्ताह (14 दिन) |
| बातचीत का स्थान | इस्लामाबाद, पाकिस्तान |
| भारत का रुख | शांति, सुरक्षा और कूटनीति का समर्थन |
| ईरान का प्रस्ताव | 10 सूत्रीय योजना (ट्रंप ने इसे व्यावहारिक बताया) |
| मुख्य मांग | Strait of Hormuz पर नियंत्रण और अनाक्रमण संधि |
| मध्यस्थ देश | पाकिस्तान और चीन की मुख्य भूमिका |
विदेशी ताकतों की भूमिका और व्यापार पर असर
इस समझौते को सफल बनाने में पाकिस्तान और चीन ने अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस बातचीत की जमीन तैयार करने में शामिल रहे हैं। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने Strait of Hormuz के जरिए जहाजों की आवाजाही सुरक्षित करने के लिए 15 देशों के साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई है। भारत के लिए यह समझौता इसलिए राहत भरा है क्योंकि खाड़ी देशों में करोड़ों भारतीय प्रवासी रहते हैं और वहां शांति रहने से व्यापार और तेल की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहती है।




