कुवैत ने किया अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का स्वागत, पाकिस्तान की कोशिशों से दो हफ्ते की मिली शांति
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम यानी सीजफायर समझौते का स्वागत किया है. यह समझौता डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 8 अप्रैल 2026 को घोषित किया गया था, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई है. कुवैत ने इस कूटनीतिक कोशिश की तारीफ करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी और तनाव कम होगा. इस समझौते के तहत ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी पर फिलहाल रोक लग गई है.
सीजफायर समझौते की मुख्य बातें और शर्तें
इस दो हफ्ते के समझौते को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं जो इस प्रकार हैं:
- डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस समझौते का ऐलान किया और पाकिस्तान की मध्यस्थता को सराहा.
- ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी दो हफ्ते के युद्धविराम की पुष्टि कर दी है.
- ईरान ने इस दौरान ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह सुरक्षित खोलने पर सहमति जताई है.
- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों से अपील की है कि इस समय का उपयोग स्थायी शांति के लिए करें.
- अगले दौर की बातचीत 10 अप्रैल 2026 से इस्लामाबाद में शुरू होने वाली है.
क्षेत्रीय सुरक्षा पर कुवैत का कड़ा रुख
कुवैत ने अपने आधिकारिक बयान में यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का हिस्सा नहीं बनेगा. कुवैत ने दोहराया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ हमले के लिए नहीं होने देगा. हाल ही में कुवैत को 28 ड्रोनों के हमले का सामना करना पड़ा था, जिससे उसके बिजली और पानी के प्लांट को नुकसान पहुंचा था. इसके अलावा बसरा में कुवैती दूतावास में हुई तोड़फोड़ की घटना पर भी कुवैत ने नाराजगी जताई है और इराक को इसका जिम्मेदार ठहराया है. हालांकि, इस सीजफायर के बाद अब खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
अन्य देशों की प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
इस समझौते पर दुनिया के अन्य देशों ने भी अपनी नजरें बनाई हुई हैं. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समझौते का समर्थन तो किया है, लेकिन स्पष्ट किया है कि यह लेबनान में चल रही लड़ाई पर लागू नहीं होगा. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भी इस सिलसिले में खाड़ी देशों के दौरे पर जा रहे हैं. चीन और ओमान ने भी इस पहल का स्वागत किया है. हालांकि, यूएई और बहरीन से अभी भी कुछ मिसाइल अलर्ट की खबरें आ रही हैं, लेकिन मुख्य युद्धविराम अभी लागू है.




