US-Iran Ceasefire: लेबनान पर समझौते से अमेरिका ने किया इनकार, इसराइल के हमले में 250 से ज़्यादा मरे, ईरान ने बंद किया समुद्री रास्ता.
अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम को लेकर बड़ी उलझन पैदा हो गई है। अमेरिका का कहना है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है, जबकि पाकिस्तान और ईरान इसके उलट दावा कर रहे हैं। इसी बीच इसराइल ने लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है जिसमें सैंकड़ों लोगों की जान चली गई है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि ईरान ने पलटवार करते हुए Strait of Hormuz को फिर से बंद कर दिया है जिससे दुनिया भर में हड़कंप मच गया है।
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युद्धविराम की शर्तों को लेकर क्या है विवाद?
अमेरिका के उप-राष्ट्रपति JD Vance ने साफ़ शब्दों में कहा है कि लेबनान इस युद्धविराम का हिस्सा नहीं है। उन्होंने ईरान के दावों को गलतफहमी करार दिया और कहा कि अमेरिका ने कभी ऐसी कोई शर्त नहीं मानी थी। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि समझौते में लेबनान का जिक्र साफ तौर पर था। इस मतभेद की वजह से शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है और खाड़ी देशों में तनाव फिर से बढ़ गया है।
इसराइल के हमले और जान-माल का नुकसान
| विवरण | आंकड़े और जानकारी |
|---|---|
| हमले का समय | 8 अप्रैल 2026 |
| विमानों की संख्या | 50 फाइटर जेट्स |
| गिराए गए बम | लगभग 160 बम |
| टारगेट किए गए स्थान | मध्य Beirut सहित 100 ठिकाने |
| मौतों की संख्या | 112 से 254 के बीच |
| ईरान का एक्शन | Strait of Hormuz को बंद किया |
इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने स्पष्ट किया है कि वह Hezbollah के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे। लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। ईरान ने साफ़ कर दिया है कि जब तक लेबनान में हमला नहीं रुकता, तब तक समुद्री रास्ता नहीं खोला जाएगा। इससे खाड़ी से होने वाले व्यापार और तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
अब आगे क्या होगा और बातचीत का अगला दौर
शांति बहाली के लिए अब सबकी नजरें पाकिस्तान पर टिकी हैं क्योंकि शुक्रवार 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में फिर से बातचीत शुरू होने वाली है। इस बातचीत में अमेरिका की तरफ से JD Vance के साथ Jared Kushner और Steve Witkoff भी शामिल होंगे। इस बैठक में लेबनान के मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की जाएगी ताकि युद्धविराम को पूरी तरह से लागू किया जा सके। व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की है कि वे अपनी स्थिति सभी देशों को समझा चुके हैं।




