Lebanon Israel War Update: लेबनान में 11 लाख लोग हुए बेघर, अपनों को अस्थायी कब्रों में दफनाने की मजबूरी, अब तक 1500 की मौत.
लेबनान में जारी इसराइली हमलों के बीच एक दर्दनाक मानवीय संकट पैदा हो गया है। यहां न केवल जीवित रहने की जद्दोजहद है, बल्कि मरने के बाद भी लोगों को सुकून नहीं मिल रहा है। विस्थापन और बमबारी की वजह से हजारों परिवार अपने करीबियों को उनके पुश्तैनी गांवों में दफन नहीं कर पा रहे हैं। टायर जैसे शहरों में अब मृतकों को अस्थायी कब्रों में दफनाने का सिलसिला शुरू हो गया है ताकि भविष्य में शांति होने पर उन्हें वापस घर ले जाया जा सके।
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मरने वालों और बेघर होने वालों के ताजा आंकड़े क्या हैं?
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 की शुरुआत तक मरने वालों की संख्या 1,500 के करीब पहुंच गई है। इसमें 129 मासूम बच्चे भी शामिल हैं और 4,400 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अब तक 11 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हुए हैं। टायर शहर में हाल ही में एक ही परिवार के 8 सदस्यों की मौत की खबर आई है, जिन्हें एक साथ अस्थायी सामूहिक कब्र में दफनाया गया क्योंकि उनके घर वापस जाना फिलहाल संभव नहीं है।
अस्थायी कब्रों और अंतरराष्ट्रीय राहत कार्यों की जानकारी
इस्लामी कानूनों के तहत वदीहा यानी अमानत के तौर पर दफनाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसमें शव को ताबूत में रखकर दफनाया जाता है ताकि युद्ध रुकने पर उन्हें सम्मान के साथ उनके पैतृक स्थान ले जाया जा सके। इस मानवीय संकट के बीच कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मदद में जुटी हैं:
- UNICEF: इसने अब तक 30 लाख से ज्यादा भोजन के पैकेट और जलापूर्ति के लिए ईंधन मुहैया कराया है।
- OCHA: राहत कार्यों के लिए 30 मिलियन डॉलर का फंड आवंटित किया गया है ताकि बेघर लोगों की मदद हो सके।
- ICRC: अस्पतालों को जरूरी उपकरण और शवों के सम्मानजनक प्रबंधन के लिए बॉडी बैग्स दे रहा है।
- UNFPA: गर्भवती महिलाओं और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 9 मोबाइल हेल्थ यूनिट चला रहा है।
8 अप्रैल को जारी रिपोर्ट के अनुसार, इसराइली सेना ने लेबनान में 100 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे विस्थापन का संकट और गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत मृतकों के शवों का सम्मान करना और उन्हें उचित तरीके से दफन करना युद्धरत पक्षों की जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा हालात में परिवारों को अपनों को गुमनाम नंबरों वाली कब्रों में छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है।





