JD Vance ने किया साफ़, अमेरिका-ईरान युद्धविराम से लेबनान बाहर, 11 अप्रैल को पाकिस्तान में होगी बड़ी बैठक.
अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। उप-राष्ट्रपति JD Vance ने साफ़ तौर पर कहा है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है। व्हाइट हाउस ने बताया है कि ईरानी बातचीत करने वालों की तरफ से कुछ गलतफहमी हुई थी, लेकिन असल में लेबनान को इस शांति प्रक्रिया से अलग रखा गया है। इस स्पष्टीकरण के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में हलचल तेज हो गई है क्योंकि लेबनान पर इसराइली हमले जारी हैं।
लेबनान को युद्धविराम से बाहर क्यों रखा गया है?
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt और खुद राष्ट्रपति Donald Trump ने इस फैसले की पुष्टि की है। राष्ट्रपति Trump के अनुसार, हिजबुल्लाह की गतिविधियों की वजह से लेबनान को इस समझौते में नहीं रखा जा सकता। इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी साफ कर दिया है कि 7 अप्रैल से लागू हुआ दो हफ्ते का युद्धविराम केवल ईरान और अमेरिका के बीच है, यह लेबनान पर लागू नहीं होता। इसी वजह से 8 अप्रैल को इसराइल ने लेबनान में अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया, जिसे ‘एटरनल डार्कनेस’ का नाम दिया गया है। इन हमलों में काफी जानी नुकसान हुआ है और कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया है।
पाकिस्तान में होने वाली आगामी बैठक की मुख्य बातें
इस पूरे मामले को सुलझाने और ईरान के साथ सीधे बातचीत करने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। अगले कुछ दिनों में होने वाली घटनाओं की जानकारी नीचे दी गई है:
- उप-राष्ट्रपति JD Vance एक विशेष अमेरिकी दल लेकर शनिवार 11 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद जाएंगे।
- इस दल में Steve Witkoff और Jared Kushner जैसे बड़े नाम भी शामिल होंगे।
- ईरान के विदेश मंत्री और संसद अध्यक्ष ने दावा किया है कि लेबनान समझौते में शामिल था और अमेरिका नियमों को तोड़ रहा है।
- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने पहले कहा था कि युद्धविराम हर जगह लागू है, जिस पर अब विवाद खड़ा हो गया है।
- फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भी अब चाहते हैं कि क्षेत्रीय शांति के लिए लेबनान को इस समझौते में जगह दी जाए।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे तो वह इस युद्धविराम समझौते से पूरी तरह पीछे हट सकता है। लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने इसराइली हमलों को बर्बरता करार दिया है। अब सबकी नजरें 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली सीधी बातचीत पर टिकी हैं, जहाँ भविष्य की रणनीति तय होगी।




