Al-Aqsa Mosque में बलि देने की 7 बार हुई कोशिश, 1967 के बाद पहली बार सामने आया इतना बड़ा मामला
जेरूसलम में अल-अक्सा मस्जिद परिसर में यहूदी त्यौहार पासओवर के दौरान तनाव काफी बढ़ गया है। इस साल इसराइली सेटलर्स ने मस्जिद परिसर के अंदर जानवरों की बलि देने की सात अलग-अलग कोशिशें की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1967 में इसराइली कब्जे के बाद से यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। फलस्तीनी प्रशासन ने इसे मस्जिद की पवित्रता और अंतरराष्ट्रीय नियमों का सीधा उल्लंघन बताया है और इस पर गहरी चिंता जताई है।
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क्या है पूरा मामला और क्या कहते हैं नियम?
अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम में तीसरा सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत यहां गैर-मुस्लिमों को किसी भी तरह की इबादत या धार्मिक रस्म करने की अनुमति नहीं दी गई है। यहूदी लोग यहां सिर्फ एक सैलानी के तौर पर जा सकते हैं, लेकिन उन्हें प्रार्थना या बलि जैसे अनुष्ठान करने की मनाही है। इसके बावजूद, 2 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 के बीच कुछ समूहों ने गुपचुप तरीके से बलि के जानवरों को अंदर ले जाने की कोशिश की। दो मामलों में तो लोग जानवरों को जेरूसलम के पुराने शहर के अंदर तक ले जाने में कामयाब भी हो गए थे।
मस्जिद में इस वक्त क्या हैं हालात और क्या है वजह?
जेरूसलम गवर्नर की तरफ से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ खास संगठन सोशल मीडिया और AI की मदद से कट्टरपंथियों को उकसा रहे हैं। ये संगठन मस्जिद के अंदर बलि देकर वहां अपना कब्जा जमाना चाहते हैं। इस वक्त मस्जिद और चर्च ऑफ द होली सेपुलचर पिछले 37 दिनों से बंद हैं, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है।
- यह घटनाएं 2 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 के बीच पासओवर त्यौहार के दौरान दर्ज की गईं।
- इसराइली पुलिस ने कुछ सेटलर्स को हिरासत में लिया और उनके पास से जानवर जब्त किए।
- कुल 7 बार बलि देने की कोशिश हुई, जो 1967 के बाद का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
- इसराइली प्रशासन ने सुरक्षा और इमरजेंसी का हवाला देकर मस्जिद को बंद रखा हुआ है।
- फलस्तीनी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इन पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए कदम उठाएं।




