Saudi Arabia News: ईरान ने दी सऊदी के यानबू पोर्ट को उड़ाने की धमकी, कहा अमेरिका ने हमला किया तो तेल पहुंचेगा 150 डॉलर के पार.
ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव अब बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच गया है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खुली चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उनकी ज़मीन पर कदम रखा, तो वे सऊदी अरब के लाल सागर तट पर स्थित यानबू पोर्ट को निशाना बनाएंगे. इस स्थिति ने मिडिल ईस्ट में रह रहे प्रवासियों और खास तौर पर भारतीय समुदाय के बीच चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि तेल की सप्लाई रुकने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा. यानबू पोर्ट सऊदी के लिए तेल निर्यात का एक बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है, जो अब सीधे निशाने पर है.
ईरान की तरफ से क्या चेतावनी दी गई है?
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो वे चुप नहीं बैठेंगे. ईरान के उपराष्ट्रपति इस्माइल सघाब एसफहानी ने साफ़ शब्दों में कहा है कि अगर ईरानी ज़मीन पर हमला हुआ, तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल के पार चली जाएगी. उन्होंने फुजैराह और यानबू जैसे बड़े पोर्ट्स को तबाह करने की धमकी दी है. इसके अलावा, ईरान ने मिडिल ईस्ट में रहने वाले आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उन होटलों से दूर रहें जहां अमेरिकी सैनिक रुकते हैं. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को भी दुश्मन देशों के जहाज़ों के लिए बंद करने की बात कही है.
यानबू पोर्ट और तेल रिफाइनरी पर अब तक हुए हमले
यानबू पोर्ट की अहमियत इसलिए भी ज़्यादा है क्योंकि यह सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का मुख्य केंद्र है. पिछले कुछ हफ्तों में यहाँ कई हमले दर्ज किए गए हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:
| तारीख | घटना की जानकारी |
|---|---|
| 19 मार्च 2026 | यानबू की SAMREF रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ और मिसाइलें दागी गईं. |
| 27 मार्च 2026 | ईरान ने अमेरिकी हमले की स्थिति में यानबू को उड़ाने की शर्तिया धमकी दी. |
| 3 अप्रैल 2026 | ईरानी ड्रोन ने SAMREF रिफाइनरी पर सफल स्ट्राइक की. |
| 8 अप्रैल 2026 | सऊदी की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को हमले में निशाना बनाया गया. |
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने इन हमलों के बाद बयान दिया है कि ईरान के साथ भरोसा अब पूरी तरह टूट गया है. यानबू पोर्ट के रणनीतिक महत्व को देखते हुए दक्षिण कोरिया ने भी अपने जहाज़ यहाँ भेजने की योजना बनाई है ताकि तेल की सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार किए जा सकें. सऊदी अरब ने इन हरकतों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है.




