White House का ऐलान, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तो जल्द सामान्य होंगे हालात, ईरान के साथ दो हफ्ते का हुआ समझौता
व्हाइट हाउस ने साफ़ कर दिया है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोल दिया जाता है, तो इलाके में स्थिति बहुत जल्द सामान्य हो जाएगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने इस समुद्री रास्ते को बिना किसी रुकावट या टैक्स के खुलवाना अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। इस समय अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम यानी सीजफायर पर सहमति बन गई है। इस समझौते को कराने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बड़ी भूमिका निभाई है और इसराइल भी हमले रोकने के लिए तैयार हो गया है।
ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की बड़ी बातें क्या हैं?
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट के अनुसार, ईरान ने खुद युद्धविराम की मांग की थी और ट्रंप द्वारा दी गई समय सीमा से पहले रास्ता खोलने पर राजी हुआ है। हालांकि ईरान की तरफ से पहले दिए गए 10 सूत्रीय प्रस्ताव को अमेरिका ने पूरी तरह खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में एक नए और बेहतर प्लान पर सहमति बनी। अब इस मामले पर अगली बड़ी बैठक 10 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली है। इस बातचीत के लिए अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर के शामिल होने की खबर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अभी क्या स्थिति है?
| विषय | ताजा अपडेट |
|---|---|
| ट्रैफिक की स्थिति | व्हाइट हाउस ने कहा है कि वहां जहाजों की आवाजाही में बढ़ोतरी देखी गई है। |
| ईरान का दावा | ईरान के रास्ता बंद करने के दावों को अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर गलत बताया है। |
| चीनी जहाजों का मुद्दा | 9 अप्रैल को खबर आई कि ईरान ने कुछ चीनी तेल टैंकर्स को रोका है, जिससे तनाव बना हुआ है। |
| ट्रंप का रुख | राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले कड़ी चेतावनी दी थी, लेकिन समझौता होने के बाद अपने कदम पीछे खींचे हैं। |
आम जनता और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर राहत भरी है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से ही दुनिया का सबसे ज्यादा तेल और गैस का व्यापार होता है। अगर यह रास्ता बंद होता है तो दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ता है। व्हाइट हाउस का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर इस रास्ते को बंद नहीं होने देंगे। फिलहाल सीजफायर होने से युद्ध का खतरा टल गया है, जिससे खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता कम हुई है।




