USA और Iran के बीच पाकिस्तान में शुरू हुई शांति वार्ता, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बड़ी रार, कई देशों की नज़रें
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आमने-सामने की शांति वार्ता शुरू हुई है। दशकों बाद दोनों देशों के बीच इतने ऊंचे स्तर पर सीधी बातचीत हो रही है। हालांकि एक अस्थायी युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों देशों के बीच अभी भी कई मुद्दों पर गहरी असहमति बनी हुई है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और जमी हुई संपत्ति पर क्या विवाद है?
बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का है। अमेरिका ने यहाँ से बारूदी सुरंगें हटाने के लिए अपने विध्वंसक जहाजों को तैनात किया है। दूसरी ओर, ईरान इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण चाहता है और पारगमन शुल्क (transit fees) लगाने का प्रस्ताव दिया है।
संपत्तियों को लेकर भी चर्चा हुई है। एक ईरानी स्रोत के अनुसार, अमेरिका ने कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा ईरान की करीब 6 अरब डॉलर की संपत्ति छोड़ने पर सहमति जताई है। यह फैसला जलमार्ग को सुरक्षित खोलने के बदले में लिया गया बताया जा रहा है, हालांकि अमेरिका ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बातचीत में कौन शामिल है और क्या हैं मुख्य मांगें?
इस बैठक में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति JD Vance, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हुए। ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची नेतृत्व कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
| पक्ष | प्रस्ताव और मुख्य मांगें |
|---|---|
| ईरान | 10 सूत्रीय प्रस्ताव, जिसमें आर्थिक प्रतिबंध हटाना, क्षेत्रीय सहयोगियों पर हमले रोकना और मुआवजे की मांग शामिल है |
| अमेरिका | 15 सूत्रीय प्रस्ताव, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना और जलमार्ग को पूरी तरह खोलना शामिल है |
लेबनान और इसराइल की जंग पर क्या असर पड़ेगा?
ईरान का कहना है कि वर्तमान युद्धविराम लेबनान में भी लागू होना चाहिए, लेकिन व्हाइट हाउस और इसराइल इसे मानने को तैयार नहीं हैं। शनिवार को भी इसराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के 200 से ज़्यादा ठिकानों पर हमले किए। ईरान ने शर्त रखी है कि जब तक इसराइल हमले बंद नहीं करता, तब तक किसी स्थायी समझौते पर बात नहीं होगी।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वे इस बातचीत को गहरे अविश्वास के साथ देख रहे हैं। उनका कहना है कि पिछली बार भी बातचीत के दौरान अमेरिका और इसराइल ने हमले किए थे।




