Iran और America के बीच बातचीत नाकाम, पाकिस्तान की कोशिशों के बाद भी नहीं बनी बात, Hormuz Strait पर फंसा पेंच
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान में एक बहुत बड़ी मीटिंग हुई। इस्लामाबाद में दोनों देशों के बड़े नेताओं ने कई घंटों तक चर्चा की ताकि चल रही जंग को खत्म किया जा सके। हालांकि, यह बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई और दोनों देश अपनी शर्तों पर अड़े रहे।
बातचीत क्यों नाकाम रही और किन बातों पर हुआ विवाद?
इस मीटिंग में अमेरिका ने शर्त रखी थी कि ईरान को यह साफ करना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। वहीं ईरान ने अपनी कुछ मांगें रखीं जिन्हें अमेरिका ने नहीं माना। ईरान चाहता था कि उसके फ्रीज किए गए तेल का पैसा वापस मिले और Beirut पर हो रहे हमलों को रोका जाए। इसके अलावा, ईरान अपने पास मौजूद यूरेनियम को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था।
इस हाई लेवल मीटिंग में कौन-कौन शामिल था?
यह मुलाकात पिछले कई सालों में दोनों देशों के बीच सबसे बड़े स्तर की मीटिंग थी। इसमें शामिल मुख्य लोगों की जानकारी नीचे दी गई है:
| देश | मुख्य प्रतिनिधि |
|---|---|
| अमेरिका | उप राष्ट्रपति JD Vance, Steve Witkoff और Jared Kushner |
| ईरान | संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची |
| पाकिस्तान (मध्यस्थ) | प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर |
सऊदी अरब और अन्य देशों का इस पर क्या कहना है?
सऊदी अरब ने पाकिस्तान की कोशिशों का समर्थन किया है और वह चाहता है कि दोनों देशों के बीच स्थायी शांति हो। सऊदी ने साफ कहा है कि Hormuz Strait को व्यापार और जहाजों के लिए खुला रखना बहुत जरूरी है। वहीं ओमान के विदेश मंत्री ने भी युद्धविराम को आगे बढ़ाने और बातचीत जारी रखने की अपील की है। सऊदी अरब ने ईरान को पहले ही बता दिया था कि वह अपने इलाके का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा।




