US-Iran Tension: अमेरिका ने ईरान के पोर्ट्स की घेराबंदी की, पाकिस्तान में बातचीत फेल, दुनिया भर में बढ़ा तेल का दाम.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब बहुत बढ़ गया है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान के सभी बंदरगाहों की घेराबंदी यानी नेवल ब्लॉकेड शुरू कर दिया है, जिससे खाड़ी देशों और पूरी दुनिया में हलचल मच गई है।
अमेरिका ने यह बड़ा कदम क्यों उठाया?
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिकी नौसेना उन सभी जहाजों को रोकेगी जो ईरान को अवैध टोल दे रहे हैं। उन्होंने साफ़ किया कि इंटरनेशनल वॉटर में किसी भी ऐसे जहाज को सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा जिसने ईरान को पैसे दिए हों। वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे JD Vance ने बताया कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का भरोसा नहीं दे पाया, इसलिए यह फैसला लेना पड़ा।
ईरान की क्या प्रतिक्रिया है और एक्सपर्ट्स ने क्या चेतावनी दी?
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पूरी तरह उनके कंट्रोल में है और किसी भी अमेरिकी हरकत का जवाब कड़ी सैन्य कार्रवाई से दिया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह बातचीत में अपनी शर्तें बदल रहा है। वहीं, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर Mehran Kamrava ने कहा कि ट्रंप की इस सख्त भाषा की वजह से ईरान खाड़ी देशों की एनर्जी सप्लाई पर हमला कर सकता है।
इस विवाद की मुख्य बातें क्या हैं?
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| बातचीत का समय | 11 और 12 अप्रैल 2026 (इस्लामाबाद, पाकिस्तान) |
| ब्लॉकेड की शुरुआत | 13 अप्रैल 2026, सुबह 10 बजे EDT |
| मुख्य कारण | परमाणु हथियार और होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद |
| बाज़ार पर असर | तेल की कीमतों में भारी उछाल, जहाजों की आवाजाही बंद |
| US कमांड का रुख | ब्लॉकेड सभी देशों के जहाजों पर लागू होगा, लेकिन गैर-ईरानी पोर्ट्स वाले जहाज निकल सकेंगे |




