Israel-Iran Conflict: इज़राइल के दो-तिहाई लोग सीजफायर के खिलाफ, लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर हमले जारी रहेंगे
इज़राइल में हुए एक नए सर्वे से पता चला है कि वहां के ज़्यादातर लोग ईरान के साथ युद्धविराम यानी सीजफायर के समर्थन में नहीं हैं। Hebrew University of Jerusalem के इस पोल में करीब दो-तिहाई लोग इसके खिलाफ नज़र आए। लोगों के बीच इस बात को लेकर बहस चल रही है कि क्या युद्धविराम का पालन करना चाहिए या ईरान पर हमले फिर से शुरू करने चाहिए।
ℹ: अमेरिका और इसराइल की जंग से ईरान में भारी तबाही, 77 ऐतिहासिक इमारतें टूटीं और पानी का संकट बढ़ा।
सर्वे में क्या बातें सामने आईं?
- करीब दो-तिहाई इज़राइली लोग ईरान के साथ सीजफायर का समर्थन नहीं करते हैं।
- 61% लोगों का मानना है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह के साथ चल रहे संघर्ष में सीजफायर लागू नहीं होना चाहिए।
- इज़राइल के अंदर इस मुद्दे पर लोगों की राय बंटी हुई है।
अमेरिका और ईरान की बातचीत क्यों नाकाम हुई?
पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में दो दिनों तक बातचीत हुई। यह वार्ता 12 अप्रैल 2026 को बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि ईरान ने मुख्य शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, जो ईरान के लिए बुरी खबर है। अमेरिका ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करने की धमकी भी दी है।
लेबनान और हिज़्बुल्लाह पर क्या है इज़राइल का रुख?
प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ़ कर दिया है कि ईरान के साथ सीजफायर की बात लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अभियानों पर लागू नहीं होगी। इज़राइल ने ऐलान किया है कि वह अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हमले बिना रुके जारी रखेगा। दक्षिणी लेबनान में अभी भी हिंसा जारी है और दोनों तरफ से गोलाबारी हो रही है। नबातियेह में एक हमले में लेबनान के 13 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी।




