अमेरिका और इसराइल की जंग से ईरान में भारी तबाही, 77 ऐतिहासिक इमारतें टूटीं और पानी का संकट बढ़ा
अमेरिका और इसराइल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब ईरान के पर्यावरण और संस्कृति पर दिखने लगा है। ईरान की समाचार एजेंसी IRNA ने बताया कि हमलों की वजह से वहां की कई पुरानी इमारतें और प्राकृतिक संसाधन बुरी तरह बर्बाद हो गए हैं। इस जंग ने न केवल इमारतों को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि लाखों लोगों के पीने के पानी और सेहत पर भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।
ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों का क्या हाल है?
तेहरान की 77 ऐतिहासिक इमारतों, महलों और संग्रहालयों को भारी नुकसान पहुंचा है। इनमें से 38 स्मारक राष्ट्रीय स्तर पर रजिस्टर्ड हैं और करीब 27 इमारतें कजार युग की हैं। फारुखाबाद पैलेस, इशरतबाद पैलेस और कसर प्रिज़न जैसी जगहें इन हमलों की चपेट में आईं। विरासत अधिकारी सज्जाद असगरी ने बताया कि लगभग 90% नुकसान मामूली है, जबकि 10% नुकसान काफी गंभीर है।
पर्यावरण और पानी की सप्लाई पर क्या असर पड़ा?
जंग की वजह से हवा और पानी में जहरीले रसायन और भारी धातुएं घुल गई हैं, जिससे खेती और आम लोगों की सेहत को खतरा है। तेल डिपो में लगी आग से निकलने वाला जहरीला धुआं हवा, जमीन और पानी को प्रदूषित कर रहा है। इसके अलावा, पानी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है जिससे लाखों लोग परेशान हैं।
| विवरण | प्रभाव/आंकड़े |
|---|---|
| कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (14 दिन) | 5 मिलियन टन |
| इमारतों के टूटने से CO2 उत्सर्जन | 2.4 मिलियन टन |
| क्षतिग्रस्त जल उपचार संयंत्र | 14 (तेहरान, इस्फहान, अहवाज) |
| पानी की समस्या से प्रभावित लोग | 42 लाख लोग |
| प्रदूषित नदियां | कारून और ज़यांदेह |
| सैन्य ईंधन से CO2 उत्सर्जन | 5.29 लाख tCO2e |
| सैन्य हार्डवेयर से CO2 उत्सर्जन | 1.72 लाख tCO2e |
दुनिया और बड़ी संस्थाओं ने इस पर क्या कहा?
UN Environment Programme (UNEP) ने उपग्रह तस्वीरों के जरिए तेल सुविधाओं पर हमलों की पुष्टि की है और चेतावनी दी है कि इसका असर लंबे समय तक रहेगा। क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क ने इन हमलों को गैरकानूनी बताया और तुरंत युद्ध रोकने की मांग की। डोनाल्ड ट्रम्प ने साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले से अमेरिका को अलग बताया और इसका दोष इसराइल पर मढ़ा। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर ने कूटनीति के जरिए मामला सुलझाने की बात कही है।




