US और ईरान के बीच बातचीत फेल, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की, पाकिस्तान की कोशिशें रहीं नाकाम
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा विवाद अब और बढ़ गया है। पाकिस्तान में हुई कई घंटों की बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई। इस विफलता के बाद अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ की सैन्य घेराबंदी शुरू कर दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया है।
इस्लामाबाद में बातचीत क्यों फेल हुई?
अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि 11 अप्रैल से 13 अप्रैल तक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मिले थे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि मुख्य विवाद ईरान के परमाणु लक्ष्यों को लेकर था, जिस पर ईरान झुकने को तैयार नहीं था। इसी वजह से बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हुई और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल को ईरान के समुद्री रास्तों को ब्लॉक करने का फैसला लिया।
ईरान का जवाब और अन्य देशों की चिंताएं
ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर उनके व्यापारिक रास्तों को रोका गया, तो खाड़ी के अन्य बंदरगाह भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। दूसरी तरफ, जापान और तुर्की जैसे देश इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। तुर्की ने उम्मीद जताई है कि 21 अप्रैल को युद्धविराम खत्म होने से पहले एक बार फिर बातचीत हो सकेगी।
इस पूरे मामले में शामिल मुख्य देशों और उनकी भूमिका की जानकारी नीचे दी गई है:
| पक्ष/देश | मुख्य व्यक्ति/भूमिका | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| पाकिस्तान | PM शहबाज़ शरीफ, इशहाक डार | मध्यस्थता जारी रखने की कोशिश |
| अमेरिका | राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, JD Vance | ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी की |
| ईरान | मोहम्मद-बाक़र क़ालिबाफ | जवाबी हमले की चेतावनी दी |
| जापान | PM TAKAICHI Sanae | तनाव कम करने की अपील की |
| तुर्की | हाकन फिदान | अगले दौर की बातचीत की उम्मीद |




