USA-Iran Conflict: अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की, तेल की कीमतों में उछाल, दुनिया भर में तनाव बढ़ा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है. इस्लामाबाद में हुई सीधी बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हुई, जिसके तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी है. इस बड़ी कार्रवाई के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है.
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इस्लामाबाद बातचीत में क्या हुआ और अमेरिका ने क्या कदम उठाए
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चली बातचीत रविवार 12 अप्रैल 2026 को खत्म हुई, लेकिन दोनों देश किसी एक फैसले पर सहमत नहीं हो पाए. इसके बाद सोमवार 13 अप्रैल को सुबह 10:00 बजे (EDT) अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों और Strait of Hormuz के कुछ हिस्सों की घेराबंदी कर दी. राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि अमेरिकी नौसेना उन सभी जहाजों को रोकेगी जिन्होंने ईरान को टोल टैक्स दिया है.
अमेरिका की शर्तें और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिका का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता और उसे यूरेनियम बनाना पूरी तरह बंद करना होगा. अमेरिका ने यह भी मांग की है कि ईरान Hamas, Hezbollah और Houthis जैसे समूहों को पैसा देना बंद करे. वहीं ईरान ने इस घेराबंदी को गैरकानूनी और समुद्री डकैती बताया है. ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने आरोप लगाया कि अमेरिका बातचीत में अपनी शर्तें बदल रहा है, जबकि ईरान ने पूरी ईमानदारी से बात की.
तनाव का असर और बीच-बचाव करने वाले देश
इस विवाद के कारण दुनिया भर में तेल के दाम बढ़ गए हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा. वर्तमान में दोनों देशों के बीच ceasefire 22 अप्रैल 2026 तक लागू है. हालात को संभालने के लिए कई देश कोशिश कर रहे हैं:
| भूमिका | देश/संस्था |
|---|---|
| मध्यस्थ (Mediators) | Pakistan, Turkey, Oman और Egypt |
| समर्थन | Saudi Arabia (सीजफायर का स्वागत किया) |
| सुरक्षा चिंताएं | Israel, Hamas, Hezbollah और Houthis |
ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि अगर उनके बंदरगाह असुरक्षित रहे, तो क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा. उधर अमेरिका के उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने कहा कि अमेरिका ने अपना सबसे अच्छा प्रस्ताव दिया था, लेकिन ईरान ने उसे स्वीकार नहीं किया.





