US और ईरान के बीच फिर हो सकती है बातचीत, 21 अप्रैल को खत्म होगी सीजफायर की डेडलाइन, ट्रंप ने लगाई पोर्ट्स पर पाबंदी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच चल रही सीजफायर की समय सीमा 21 अप्रैल 2026 को खत्म होने वाली है। इस बीच अमेरिका एक बार फिर ईरान के साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत करने पर विचार कर रहा है, ताकि मामले को सुलझाया जा सके। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत की शुरुआती चर्चाएं चल रही हैं।
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी क्यों की?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल 2026 को ईरान के बंदरगाहों पर नेवल ब्लॉकेड यानी नौसैनिक घेराबंदी लगाने का ऐलान किया। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि इस्लामाबाद में 11 और 12 अप्रैल को हुई बातचीत से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। ट्रंप ने बताया कि ईरान ने उनसे संपर्क किया और डील करने की इच्छा जताई, लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं मिलेगी। इस तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।
दोनों देशों की मुख्य मांगें क्या हैं?
अमेरिका और ईरान के बीच विवाद की मुख्य वजह परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा है। दोनों देशों ने अपनी शर्तें रखी हैं, जिन्हें नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है:
| देश | मुख्य मांगें |
|---|---|
| अमेरिका (US) | यूरेनियम संवर्धन पर 20 साल का प्रतिबंध, परमाणु सुविधाओं को हटाना, हमस और हिजबुल्लाह जैसे समूहों की फंडिंग बंद करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना टोल के खोलना। |
| ईरान (Iran) | यूरेनियम प्रतिबंध के लिए छोटा समय, युद्ध हर्जाने का भुगतान, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और लेबनान सहित पूरे इलाके में सीजफायर। |
अगली बातचीत कहां और कब हो सकती है?
अमेरिकी अधिकारी अब नई तारीखों और जगहों पर चर्चा कर रहे हैं। इसके लिए जिनेवा और इस्लामाबाद जैसे शहरों को संभावित वेन्यू के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश बीच-बचाव कर रहे हैं ताकि 21 अप्रैल की डेडलाइन से पहले कोई समझौता हो सके। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी दोनों पक्षों से बातचीत फिर से शुरू करने और सीजफायर को बनाए रखने की अपील की है।




