Iran Ceasefire News: ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं अपनी शर्तें, पोर्ट्स पर अमेरिकी नाकाबंदी से बढ़ा तनाव
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ़ कर दिया है कि उनका देश शांति समझौते और युद्धविराम के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए उन्होंने कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं। राष्ट्रपति का कहना है कि ईरान ने अपनी बात अमेरिका तक पहुँचा दी है, लेकिन अमेरिकी सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। इसी बीच तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी शुरू कर दी।
ईरान ने समझौते के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
ईरान ने एक स्थायी समझौते के लिए कई मांगें रखी हैं। राष्ट्रपति Pezeshkian और अन्य अधिकारियों के अनुसार, जब तक इन शर्तों को नहीं माना जाता, अंतिम फैसला मुश्किल है। मुख्य मांगों की लिस्ट नीचे दी गई है:
| ईरान की मुख्य मांगें |
|---|
| सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाना |
| Strait of Hormuz पर ईरान का नियंत्रण बना रहे |
| मध्य पूर्व से अमेरिकी सेना की वापसी |
| ईरान और उसके सहयोगियों पर हमलों को रोकना |
| जब्त की गई ईरानी संपत्ति को वापस करना |
| UN Security Council के जरिए समझौते को कानूनी बनाना |
| यूरेनियम संवर्धन की स्वीकृति देना |
| ईरान को हर्जाना देना |
| लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना |
| अमेरिका द्वारा हमले न करने का लिखित वादा |
ताज़ा हालात और दुनिया पर इसका क्या असर होगा?
13 और 14 अप्रैल 2026 को अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ Gen. Asim Munir बातचीत करवाने की कोशिश कर रहे हैं और पाकिस्तान ने दूसरी दौर की बैठक के लिए इस्लामाबाद में बुलाने का प्रस्ताव दिया है।
राष्ट्रपति Pezeshkian ने चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz की सुरक्षा को खतरा हुआ, तो इसका असर पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ेगा। वहीं, ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को 5 साल तक रोकने का प्रस्ताव दिया था, जिसे अमेरिका ने खारिज कर दिया और 20 साल के फ्रीज की मांग की।
लेबनान और अन्य देशों की क्या स्थिति है?
इस विवाद में लेबनान भी फंसा हुआ है, जहाँ इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu सैन्य अभियान जारी रखे हुए हैं। ईरान की मांग है कि लेबनान में भी शांति हो तभी कोई अंतिम समझौता होगा। सऊदी अरब ने युद्धविराम की घोषणा का स्वागत किया है और वह मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन कर रहा है।




