West Asia Crisis: 9.5 लाख भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत का बड़ा प्लान, विदेश मंत्री Jaishankar ने संभाला मोर्चा
West Asia में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने अपने करीब 9.5 लाख नागरिकों की सुरक्षा के लिए कमर कस ली है। विदेश मंत्री S. Jaishankar खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने कई देशों के साथ तालमेल बिठाया है। इसका मुख्य मकसद संकट के समय हर भारतीय को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर उन्हें घर वापस लाना है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि फरवरी 2026 के अंत से अब तक लगभग 10 लाख भारतीय नागरिक सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। Gulf और West Asia में मौजूद भारतीय दूतावासों को ‘क्राइसिस मोड’ पर डाल दिया गया है, जहाँ 24 घंटे हेल्पलाइन चालू रखी गई हैं। दूतावासों की टीमें स्थानीय कम्युनिटी ग्रुप्स के साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि किसी भी भारतीय को परेशानी न हो। समुद्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनकी वापसी के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
भारत पहुँचने के लिए कौन से नए रास्ते और रूट बनाए गए हैं?
हवाई क्षेत्र में पाबंदियों के कारण भारत ने यात्रियों के लिए कई वैकल्पिक रास्ते तैयार किए हैं, ताकि लोग बिना किसी रुकावट के घर पहुँच सकें।
| रूट या तरीका | जानकारी |
|---|---|
| Armenia और Azerbaijan | यहाँ के रास्ते 2,313 भारतीय (जिनमें 1,028 छात्र शामिल हैं) वापस आए |
| Saudi Arabia | कुवैत से लोग सड़क मार्ग से दम्माम पहुँचकर फ्लाइट ले रहे हैं |
| Jordan और Egypt | इन देशों के जरिए ज़मीनी रास्ते से यात्रा की सुविधा दी गई है |
| UAE और Qatar | 14 अप्रैल को करीब 110 फ्लाइट्स के संचालन की तैयारी थी |
| Iraq | Iraqi Airways ने अपनी सीधी फ्लाइट्स फिर से शुरू की हैं |
विदेश मंत्री ने किन देशों से बात की और क्या चर्चा हुई?
विदेश मंत्री S. Jaishankar ने 13 और 14 अप्रैल 2026 को कुवैत, इसराइल, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों से फोन पर बातचीत की। इस चर्चा में ईरान के साथ तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा और पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर बात हुई। सरकार ने वहाँ रह रहे सभी भारतीयों को सलाह दी है कि वे स्थानीय सरकार के नियमों का सख्ती से पालन करें। भारत सरकार राज्य सरकारों के साथ भी लगातार संपर्क में है ताकि वापस आने वाले लोगों को सही सुविधा मिल सके।




