Al-Aqsa Mosque Closed: इजरायल ने 32 दिनों से बंद रखी अल-अक्सा मस्जिद, नमाजियों के लिए 15 अप्रैल तक बढ़ी पाबंदी
इजरायली अधिकारियों ने यरूशलेम में स्थित अल-अक्सा मस्जिद को पिछले 32 दिनों से लगातार फिलिस्तीनी नमाजियों के लिए बंद रखा है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई यह पाबंदी अब दूसरे महीने में प्रवेश कर गई है। इजरायल ने इस कदम के पीछे सुरक्षा कारणों और ईरान के साथ जारी युद्ध का हवाला दिया है। फिलिस्तीनी अधिकारियों के मुताबिक, 1967 के बाद से यह पहली बार है जब मस्जिद को इतने लंबे समय के लिए बंद किया गया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है।
मस्जिद कब तक बंद रहेगी और क्या हैं इजरायल के नियम?
इजरायली सरकार ने यरूशलेम के पुराने शहर में सुरक्षा व्यवस्था को काफी सख्त कर दिया है। पूरे शहर में मिलिट्री चेकपॉइंट बनाए गए हैं और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने स्टेट ऑफ इमरजेंसी को अप्रैल के मध्य तक बढ़ा दिया है, जिसके कारण अल-अक्सा मस्जिद अब कम से कम 15 अप्रैल 2026 तक बंद रहेगी। इजरायल का कहना है कि यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन फिलिस्तीनी जानकारों का मानना है कि यह मस्जिद पर नियंत्रण बढ़ाने की एक सोची-समझी नीति का हिस्सा है।
सऊदी अरब समेत इन देशों ने पाबंदी की कड़ी निंदा की
इस पाबंदी को लेकर दुनिया के कई बड़े मुस्लिम देशों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। 31 मार्च 2026 को आठ प्रमुख देशों के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी कर इजरायल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। जॉर्डन के मंत्रालय ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ एक अपराध करार दिया है।
| देश/संस्था | मुख्य टिप्पणी |
|---|---|
| सऊदी, UAE, कतर, तुर्की आदि | धार्मिक स्थलों तक पहुंच रोकने की कड़ी निंदा |
| जॉर्डन (Waqf) | मस्जिद पर केवल इस्लामिक वक्फ का कानूनी अधिकार है |
| संयुक्त राष्ट्र (UN) | एकतरफा फैसलों पर गहरी चिंता जताई गई |
| अमेरिका (White House) | पवित्र स्थलों के बंद होने पर इजरायल के सामने चिंता रखी |
आने वाले दिनों में बढ़ सकता है तनाव
आने वाले दिनों में स्थिति और भी संवेदनशील हो सकती है क्योंकि 2 अप्रैल से 9 अप्रैल के बीच यहूदी त्यौहार ‘पासओवर’ (Passover) शुरू हो रहा है। कुछ इजरायली समूह इस दौरान मस्जिद परिसर के अंदर जाने और धार्मिक रस्में निभाने की अपील कर रहे हैं। वहीं, अल-अजहर जैसी बड़ी संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि इस तरह की पाबंदियां धार्मिक स्वतंत्रता का गला घोंटने जैसी हैं। अमेरिका ने भी पवित्र स्थलों तक नमाजियों की पहुंच सुनिश्चित करने की इच्छा जताई है, हालांकि अल-अक्सा मस्जिद की बंदी पर अभी तक कोई सीधा सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।




