Al-Aqsa Mosque Update: 40 दिन बाद खुला मस्जिद का दरवाज़ा, लेकिन इसराइली सेटलर्स की घुसपैठ से बढ़ा तनाव
यरूशलेम की Al-Aqsa Mosque 40 दिनों के बंद रहने के बाद 9 अप्रैल 2026 को फिर से खुली। लेकिन मस्जिद खुलने के साथ ही वहां तनाव बढ़ गया है क्योंकि इसराइली सेटलर्स और मंत्री Itamar Ben-Gvir वहां जबरन घुस रहे हैं। इस घटना के बाद फिलिस्तीन और जॉर्डन के अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई है।
Al-Aqsa Mosque में क्या-क्या हुआ और कब हुआ?
मस्जिद के बंद होने से लेकर फिर से खुलने और वहां हुई हलचल की पूरी जानकारी नीचे दी गई टेबल में है:
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 28 फरवरी 2026 | इसराइली अधिकारियों ने मस्जिद बंद की |
| 6 अप्रैल 2026 | मंत्री Itamar Ben-Gvir बंद मस्जिद में घुसे |
| 9 अप्रैल 2026 | मस्जिद दोबारा खुली और सेटलर्स ने घुसपैठ की |
| 12 अप्रैल 2026 | Ben-Gvir ने पुलिस सुरक्षा में जाकर प्रार्थना की |
| 13-14 अप्रैल 2026 | सेटलर्स ने दोबारा घुसपैठ कर धार्मिक रस्में निभाईं |
मस्जिद के पुराने नियम और विवाद की वजह क्या है?
Al-Aqsa Mosque एक पुराने समझौते के तहत चलती है जिसे Status Quo कहा जाता है। इसके मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
- मस्जिद का पूरा नियंत्रण जॉर्डन की देखरेख में Islamic Waqf के पास है।
- नियम के मुताबिक यह जगह सिर्फ मुस्लिमों की इबादत के लिए है।
- यहूदी लोग यहां सिर्फ घूमने आ सकते हैं लेकिन प्रार्थना करना मना है।
- अब घुसपैठ के समय को बढ़ाकर सुबह 6:30 बजे से कर दिया गया है।
अधिकारियों और देशों ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
इस घटना के बाद कई बड़े अधिकारियों ने इसराइल की कड़ी निंदा की है। Palestinian Ministry of Foreign Affairs ने कहा कि इसराइल का यरूशलेम पर कोई अधिकार नहीं है। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने Ben-Gvir की यात्रा को पवित्र स्थल का अपमान और उकसावा बताया। वहीं, Islamic Waqf काउंसिल ने पश्चिमी देशों से अपील की है कि वे इसराइल पर पुराने नियमों का पालन करने का दबाव बनाएं ताकि इलाके में शांति बनी रहे।




